लखनऊ • 19 अक्टूबर 2026

मुख्य बातें

  • दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम के अंडरकवर रिपोर्टर एक सील बिल्डिंग के कागज़ लेकर प्राधिकरण अफसरों के पास पहुंचे। रिपोर्ट के अनुसार एलडीए के एक इंजीनियर ने ₹3 लाख मांगे।
  • भास्कर का दावा है कि सील खुलवाने, सीलिंग से बचाने और नक्शे से ज्यादा निर्माण के लिए तय दरें चल रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार अब पैसा एजेंटों के ज़रिए लिया जाता है, जिन्हें 10–20% कमीशन मिलता है।
  • विजिलेंस ने सालभर में 5 प्राधिकरणों के 11 अफसरों को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। इनमें सबसे ज्यादा 3-3 अफसर वाराणसी और सहारनपुर विकास प्राधिकरण के हैं।
  • ये स्टिंग में किए गए दावे हैं। रिपोर्ट में नामित अधिकारियों का पक्ष या किसी विभागीय कार्रवाई की जानकारी नहीं है, इसलिए हम उनके नाम नहीं दे रहे।

अपडेट, 22 अक्टूबर: एलडीए ने वायरल वीडियो की जांच के लिए समिति बनाई

अवैध निर्माण के बदले लेन-देन के कथित मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने जांच के आदेश दिए हैं। अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा की अध्यक्षता में समिति बनी है, जिसमें ओएसडी (आईटी) और एक अधिशासी अभियंता सदस्य हैं और लेखाधिकारी संयोजक हैं। समिति जांचेगी कि वीडियो सही है या नहीं, और एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट वीसी को सौंपेगी।

वीडियो में दिख रहे अधिकारियों पर अभी सिर्फ आरोप हैं, इसलिए हम उनके नाम नहीं दे रहे। रिपोर्ट आने पर यह खबर अपडेट होगी। (अमर उजाला, 22 अक्टूबर 2026)

भास्कर के अनुसार "रेट कार्ड"

कामदावा की गई रकम
बिल्डिंग की सील खुलवाना₹1 लाख से ₹5 लाख (एरिया के हिसाब से)
सीलिंग से बचाना₹3 लाख से ₹10 लाख
अवैध निर्माण पर कार्रवाई से बचानाएक फ्लोर का ₹1 से 3 लाख
मंजूर नक्शे से ज्यादा निर्माण₹1 से 3 लाख (एरिया और फ्लोर के हिसाब से)

स्रोत: दैनिक भास्कर इन्वेस्टिगेशन। ये दरें स्टिंग में किए गए दावों पर आधारित हैं। किसी सरकारी जांच ने इनकी पुष्टि नहीं की है।

रिपोर्ट में दिए लखनऊ के उदाहरण

  • अलीगंज अग्निकांड (22 जून 2026): 3 मंजिला बिल्डिंग में आग से 15 छात्रों की मौत हुई। भास्कर के अनुसार बिल्डिंग पर 2016 में ध्वस्तीकरण आदेश हुआ था, जो बाद में वापस ले लिया गया। एलडीए ने 18 इंजीनियरों पर कार्रवाई की सिफारिश की थी। सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले पर हमारी खबर: अलीगंज अग्निकांड: SIT रिपोर्ट और 51 अवैध इमारतें।
  • 3 मंजिल का नक्शा, बनीं 6 मंजिल: रिपोर्ट के अनुसार एक सील बिल्डिंग को खुलवाकर उसमें 6 मंजिलें बनाई गईं। 30 सितंबर 2026 को बिल्डिंग धंसने लगी और पिलर में दरारें आईं।

भास्कर ने विशेषज्ञों के हवाले से पांच कमियां गिनाईं:

  • फाइलों का डिजिटलीकरण न होना
  • मामलों के निपटारे की समय-सीमा (सिटीजन चार्टर) तय न होना
  • अधिकारियों का लंबे समय तक एक ही पद पर रहना
  • दस्तावेज़ों में पारदर्शिता की कमी
  • शिकायतों की निष्पक्ष जांच न होना

अपडेट, 24 अक्टूबर: एक आदेश की आड़ में दो इमारतों की सील खुली, विहित प्राधिकारी को नोटिस

प्रभात खबर के अनुसार दुबग्गा की एक अवैध इमारत की सील कंपाउंडिंग के बाद खोलने के आदेश की आड़ में अमीनाबाद की एक दुकान की सील खोलने का आदेश भी जारी कर दिया गया। एलडीए उपाध्यक्ष ने विहित प्राधिकारी को कारण बताओ नोटिस दिया और दुबग्गा की इमारत दोबारा सील करने को कहा। अवैध निर्माण के बदले वसूली के आरोप में प्रवर्तन ज़ोन-3 के ज़ोनल अधिकारी और एक अवर अभियंता पर कार्रवाई हुई है और ज़ोन-3 का काम ज़ोन-2 को दिया गया है। (प्रभात खबर, 24 अक्टूबर 2026)

खरीदारों के लिए इसका मतलब

  • जिस प्रॉपर्टी के बारे में कहा जाए कि "सेटिंग हो गई है, सील नहीं लगेगी", उसे न खरीदें। सील या अवैध निर्माण पर कार्रवाई कभी भी दोबारा शुरू हो सकती है, और नुकसान खरीदार का होता है।
  • बनी हुई बिल्डिंग या फ्लैट खरीद रहे हैं? स्वीकृत नक्शे में दर्ज मंजिलों को मौके पर बनी मंजिलों से मिलाएं: LDA से पास नक्शा कैसे जांचें। नक्शे से ज़्यादा मंजिलें होने पर ध्वस्तीकरण का जोखिम रहता है और बैंक लोन में भी दिक्कत आती है।
  • फायर NOC, कम्प्लीशन/अधिभोग प्रमाणपत्र, और एलडीए के किसी नोटिस या सीलिंग आदेश की जानकारी लिखित में मांगें।
  • खुद रिश्वत न दें। शिकायत के लिए विजिलेंस और एलडीए की जनता अदालत जैसे मंच मौजूद हैं।

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स्रोत: दैनिक भास्कर इन्वेस्टिगेशन