लखनऊ • 26 अक्टूबर 2026

मुख्य बातें

  • प्रदेश सरकार रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण की व्यवस्था पर काम कर रही है: रजिस्ट्री का डेटा एपीआई से सीधे संबंधित विभाग तक पहुंचेगा।
  • पायलट के लिए आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की ओर से लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) चुना गया है। राजस्व विभाग कुछ गांव और नगर विकास विभाग कम से कम एक नगर निकाय चुनेगा।
  • ग्रामीण इलाकों में बेचने के अधिकार की प्रथम दृष्टया पुष्टि के लिए खतौनी और घरौनी मान्य अभिलेख माने गए। एलडीए/परिषद की संपत्तियों में आवंटन पत्र, रजिस्ट्री, बैनामा और लीज डीड।
  • यह अभी लागू नहीं हुआ है। महानिरीक्षक निबंधन की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के बाद राजस्व विभाग एसओपी बनाएगा। कोई तारीख तय नहीं है।

बैठक में क्या तय हुआ

ईटीवी भारत के अनुसार 26 अक्टूबर (सोमवार) को मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में यूनिक प्रॉपर्टी आईडी व्यवस्था की समीक्षा हुई। पत्रिका के अनुसार यह स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की समीक्षा बैठक थी, जिसमें रजिस्ट्री के समय स्वामित्व के दस्तावेज़ों की जांच, रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण, साइबर तहसील और राजस्व संहिता की धारा-34 पर चर्चा हुई। (ईटीवी भारत, पत्रिका, 26 अक्टूबर 2026)

पत्रिका के अनुसार स्वतः नामांतरण के लिए अलग-अलग विभागों में पायलट संस्थाएं चुनी जानी हैं। चुनी गई संस्थाओं को स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की प्रणाली से एपीआई के ज़रिये जोड़ा जाएगा, जिससे पंजीकृत दस्तावेज़ का ज़रूरी डेटा अपने आप उन तक पहुंच सके।

विभागपायलट के लिए
आवास एवं शहरी नियोजनलखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए)
राजस्वकुछ राजस्व गांव (नाम नहीं बताए गए)
नगर विकासकम से कम एक नगर निकाय
औद्योगिक विकासयमुना प्राधिकरण (यीडा) या कोई और औद्योगिक प्राधिकरण

यूनिक प्रॉपर्टी आईडी: किस संपत्ति की कौन सी

संपत्तिपहचान
कृषि भूमिखसरा संख्या पर आधारित यूनिक आईडी
गांव की आबादी की ज़मीन13 अंकों की आईडी (घरौनी)
शहरी संपत्ति (नगर निकाय)ई-नगरसेवा पोर्टल की 17 अंकों की आईडी, संपत्ति कर के लिए; पोर्टल पर 56.57 लाख संपत्तियां दर्ज
शहरी स्वामित्वनक्शा परियोजना का अर्बन प्रॉपर्टी कार्ड (10 निकायों में पायलट, लक्ष्य 31 दिसंबर 2026)
आवास और औद्योगिक प्राधिकरणअपनी-अपनी संपत्तियों की आईडी पर काम चल रहा है

ईटीवी भारत के अनुसार 75 में से 71 नगर निकायों में ई-नगरसेवा आईडी बनाने का काम हो चुका है। नक्शा परियोजना के पायलट के 10 निकायों में से पांच (गोरखपुर, झांसी, नवाबगंज-बाराबंकी, हरदोई और चित्रकूटधाम) में दोनों आईडी लागू होंगी; इनमें लखनऊ का नाम नहीं है। ई-नगरसेवा और केंद्र के नक्शा डेटाबेस को एपीआई से जोड़ा गया है।

रिकॉर्ड में विवाद हो या दस्तावेज़ न मिलें तो क्या प्रक्रिया होगी, यह एसओपी में तय होगा। पत्रिका के अनुसार इसके लिए 5 अक्टूबर 2026 को महानिरीक्षक निबंधन की अध्यक्षता में समिति बनी है, जो रिपोर्ट राजस्व परिषद को देगी। (पत्रिका, 26 अक्टूबर 2026)

खरीदारों के लिए इसका मतलब

  • अभी कुछ नहीं बदला है। आज रजिस्ट्री कराने वालों को नामांतरण (दाखिल-खारिज) के लिए खुद आवेदन करना होगा: लखनऊ में दाखिल-खारिज की पूरी प्रक्रिया।
  • लखनऊ नगर निगम ने नामांतरण के नियम हाल में सख्त किए हैं; सिर्फ शपथपत्र या बिना रजिस्ट्री वाले कागज़ पर नामांतरण नहीं होगा: नगर निगम दाखिल-खारिज के नए नियम।
  • रजिस्ट्री के समय स्वामित्व के दस्तावेज़ों की जांच सख्त होने की दिशा में काम हो रहा है। खरीदने से पहले ही खतौनी/घरौनी, या एलडीए की संपत्ति में आवंटन पत्र और लीज डीड की चेन पक्की कर लें।
  • स्वतः नामांतरण आने पर भी गलत रिकॉर्ड अपने आप ठीक नहीं होगा। विवाद वाली संपत्ति की प्रक्रिया अभी तय होनी है, इसलिए विवाद या केस वाली प्रॉपर्टी से दूर रहें।

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स्रोत: पत्रिका, 26 अक्टूबर 2026, ईटीवी भारत, 26 अक्टूबर 2026