लखनऊ • 26 अक्टूबर 2026

मुख्य बातें

  • आरोप: अलीगंज में दफ्तर वाली एक हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी ने सीतापुर रोड पर प्लॉट दिलाने के नाम पर 7 लोगों से ₹30.61 लाख लिए।
  • पीड़ितों को "सोसाइटी विकसित होने के बाद" रजिस्ट्री और कब्ज़े का भरोसा दिया गया था; न ज़मीन मिली, न पैसा लौटा।
  • पुलिस में सुनवाई न होने पर पीड़ित कोर्ट गए। कोर्ट के आदेश पर अलीगंज थाने में कंपनी के निदेशक समेत 9 लोगों पर मुकदमा दर्ज।
  • पैसा मांगने पर धमकाने का भी आरोप। ये अभी आरोप हैं; जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

क्या हुआ

अमर उजाला के अनुसार गुडंबा के एक शिकायतकर्ता ने 2022 में प्लॉट खरीदने के लिए कंपनी से संपर्क किया था, जिसके बाद सीतापुर रोड पर ₹3.74 लाख में उनका प्लॉट बुक किया गया। इसी तरह डालीगंज, गोमती नगर, इंदिरानगर, तेलीबाग और विकासनगर के लोगों ने ₹93 हज़ार से ₹9.92 लाख तक की रकम कंपनी के खाते में भेजी; एक व्यक्ति ने दो प्लॉट के लिए ₹9.92 लाख दिए। (अमर उजाला, 26 अक्टूबर 2026)

पीड़ित (इलाका)रकम
गुडंबा₹3.74 लाख
डालीगंज₹3.80 लाख
(इलाका नहीं बताया)₹2.80 लाख
गोमती नगर₹4.42 लाख
इंदिरानगर₹0.93 लाख
तेलीबाग₹5.00 लाख
विकासनगर (दो प्लॉट)₹9.92 लाख
कुल₹30.61 लाख

एसीपी अलीगंज शशिप्रकाश ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस पीड़ितों से संपर्क कर दस्तावेज़ जुटाएगी और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। कंपनी और आरोपियों के नाम हम यहां नहीं दे रहे, क्योंकि आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं। ऐसे ही और मामले: प्लॉट के नाम पर ठगी, तीन थानों में मुकदमे।

खरीदारों के लिए इसका मतलब

  • "सोसाइटी विकसित होने के बाद रजिस्ट्री" वाले सौदे में सबसे ज़्यादा जोखिम है। पैसा देने से पहले देखें कि ज़मीन कंपनी या विक्रेता के नाम खतौनी में दर्ज है या नहीं।
  • प्लॉटिंग वाली परियोजना का एलडीए से स्वीकृत ले-आउट और 500 वर्ग मीटर से बड़ी परियोजना में यूपी रेरा नंबर मांगें, और up-rera.in पर खुद मिलाएं।
  • हर भुगतान बैंक से करें और रसीद पर प्लॉट नंबर, गाटा संख्या और रकम लिखवाएं। इससे बाद में कोर्ट या पुलिस में दावा मज़बूत रहता है।
  • आम ठगी के तरीके और बचाव: लखनऊ के 10 बड़े प्रॉपर्टी फ्रॉड (English)।

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स्रोत: अमर उजाला, 26 अक्टूबर 2026