लखनऊ • 24 अक्टूबर 2026
मुख्य बातें
- लखनऊ नगर निगम में गृहकर नामांतरण अब सिर्फ शपथपत्र या गैर-पंजीकृत दस्तावेज़ों के आधार पर नहीं होगा।
- गैर-पंजीकृत बंटवारा पत्र, दानपत्र, अनुबंध या किरायानामा पर नामांतरण नहीं किया जाएगा। एक साल से ज़्यादा के किराये/पट्टे का समझौता भी पंजीकृत होना ज़रूरी।
- दस्तावेज़ों पर स्टांप शुल्क पूरा जमा है या नहीं, इसकी जांच होगी। एक साल पुराने पंजीकृत दस्तावेज़ भी जांच के दायरे में।
- कमी या गड़बड़ी मिलने पर नामांतरण रोक दिया जाएगा और मामला सक्षम अधिकारी के पास भेजा जाएगा।
क्या बदला
प्रभात खबर की 24 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार शासन के निर्देश पर नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी विनय राय ने सभी जोनल अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। अब तक कई मामलों में संपत्ति के मालिक बदलने के बाद शपथपत्र के आधार पर नामांतरण आगे बढ़ जाता था। अब मकान या दुकान की बिक्री, दान और बंटवारे के आधार पर नामांतरण से पहले उन दस्तावेज़ों का पंजीकरण जांचा जाएगा, और विलेखों पर लगे स्टांप की भी जांच होगी।
ध्यान दें: यह नगर निगम के गृहकर रिकॉर्ड का नामांतरण है। खतौनी (राजस्व रिकॉर्ड) का दाखिल-खारिज तहसील में अलग प्रक्रिया से होता है: दाखिल खारिज की पूरी गाइड।
खरीदारों के लिए इसका मतलब
- मकान या दुकान सिर्फ एग्रीमेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी या नोटरी कागज़ पर ले रहे हैं, तो नगर निगम में आपके नाम नामांतरण नहीं होगा। पंजीकृत बैनामा ही करवाएं: बैनामा, रजिस्ट्री और पावर ऑफ अटॉर्नी का फर्क।
- रजिस्ट्री में स्टांप शुल्क सर्किल रेट से कम जमा हुआ है तो नामांतरण अटक सकता है। सर्किल रेट और स्टांप शुल्क पहले जांच लें: लखनऊ सर्किल रेट और स्टांप ड्यूटी कैलकुलेटर।
- पारिवारिक बंटवारा या दानपत्र अपंजीकृत है तो पहले उसका पंजीकरण कराएं, उसके बाद नामांतरण के लिए आवेदन करें।
- पुरानी प्रॉपर्टी ख़रीदने से पहले पिछले बैनामों की चेन और उन पर लगा स्टांप ज़रूर जंचवाएं।
खरीदने से पहले जाँच कराएँ
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स्रोत: प्रभात खबर, 24 अक्टूबर 2026