दाखिल खारिज लखनऊ 2026: रजिस्ट्री के बाद यह काम नहीं किया तो पछताएंगे — जानिए पूरी प्रक्रिया, फीस और नए नियम
स्रोत: Amar Ujala (नवंबर 2020), Patrika (नवंबर 2020), Yugantar Pravah (अगस्त 2025), vaad.up.nic.in, upbhulekh.gov.in, UP Revenue Council आदेश, 99acres Hindi, DSD Properties फील्ड रिसर्च — अप्रैल 2026
लखनऊ में जमीन खरीदी? बैनामा हो गया? बधाई हो! लेकिन रुकिए — एक बड़ा काम अभी बाकी है। वो काम जो नहीं किया तो बैंक लोन नहीं मिलेगा, बिजली कनेक्शन में अड़चन आएगी, और सबसे बड़ी बात — जब कल आप वही जमीन बेचने जाएंगे, तो खरीदार पीछे हट जाएगा।
वो काम है दाखिल खारिज — जिसे नामांतरण या म्यूटेशन भी कहते हैं। बहुत सारे लोग यही सोचते हैं कि रजिस्ट्री के बाद जमीन पूरी तरह उनकी हो गई। यह सबसे बड़ी गलतफहमी है। सरकारी रिकॉर्ड में अब भी पुराने मालिक का ही नाम है।
अच्छी खबर यह है कि अब यह प्रक्रिया पहले से काफी आसान हो गई है। 2025 में यूपी सरकार ने बड़े बदलाव किए हैं। अब 30 दिन में काम खत्म करना अनिवार्य है। विरासत के लिए कागज कम हो गए हैं। और सबसे बड़ी बात — घर बैठे vaad.up.nic.in पर ऑनलाइन आवेदन हो जाता है।
🔴 2025 में क्या बदल गया? बड़े अपडेट
- 30 दिन की सख्त समय सीमा: गैर-विवादित दाखिल खारिज अब हर हाल में 30 दिन में निपटाना अनिवार्य (Source: Yugantar Pravah, अगस्त 2025)
- विरासत प्रक्रिया सरल: अब सिर्फ मृत्यु प्रमाण पत्र और वारिसों का पहचान पत्र काफी। पहले शपथपत्र और ग्राम पंचायत रिपोर्ट अनिवार्य थी — अब नहीं।
- RCCMS Auto-filing: Amar Ujala की रिपोर्ट के अनुसार रजिस्ट्री होते ही दाखिल खारिज का वाद स्वत: दायर हो जाता है। तहसील जाने की जरूरत ही नहीं।
- ऑनलाइन स्टेटस ट्रैकिंग: अब कोई भी आवेदक देख सकता है फाइल किस स्तर पर है और कब तक निपटेगी।
सबसे पहले समझिए — दाखिल खारिज क्या है?
दाखिल खारिज को उर्दू के दो शब्दों से बनाया गया है। दाखिल मतलब "दर्ज करना" और खारिज मतलब "हटाना"। यानी खतौनी में पुराने मालिक का नाम हटाया जाता है और नए मालिक का नाम दर्ज किया जाता है। इसे ही अंग्रेजी में Mutation और हिंदी में नामांतरण भी कहा जाता है।
लखनऊ और पूरे यूपी में यह प्रक्रिया UP Revenue Code 2006 की धारा 34 के तहत होती है। यह कानून ही तय करता है कि जमीन का रिकॉर्ड कैसे अपडेट होगा।
अब एक बड़ा सवाल — रजिस्ट्री और दाखिल खारिज में क्या फर्क है?
रजिस्ट्री और दाखिल खारिज — अलग-अलग चीजें हैं
यही एक गलती लखनऊ के लाखों लोग करते हैं। वो सोचते हैं कि रजिस्ट्री ही सब कुछ है। असल में दोनों अलग हैं:
| पैरामीटर | रजिस्ट्री (बैनामा) | दाखिल खारिज (नामांतरण) |
|---|---|---|
| क्या करती है? | कानूनी रूप से प्रॉपर्टी का ट्रांसफर | सरकारी रिकॉर्ड में नाम update |
| कहां होती है? | Sub-Registrar Office (SRO) IGRSUP के जरिए | तहसील / LDA / Nagar Nigam |
| कितना खर्च? | 7% stamp duty + 1% registration = 8% | ₹200 से ₹2,500 तक |
| कितना समय? | 1 दिन में SRO पर हो जाती है | 15-30 दिन (नए नियम से) |
| कौन सा कानून? | Registration Act 1908, UP Stamp Duty | UP Revenue Code 2006, धारा 34 |
| क्या मिलता है? | बैनामा / Sale Deed | Mutation Certificate + अपडेटेड खतौनी |
साफ बात — रजिस्ट्री "जमीन बिकी" साबित करती है, दाखिल खारिज "जमीन अब किसकी है" साबित करती है। दोनों चाहिए।
नहीं कराया तो क्या होगा? 6 बड़े नुकसान
"अरे, बाद में करवा लेंगे" — यह सोचकर कई लोग दाखिल खारिज टालते रहते हैं। फिर जब जरूरत पड़ती है, तब पछतावा होता है। देखिए क्या-क्या नुकसान हैं:
दाखिल खारिज न कराने के 6 नुकसान
- सरकारी रिकॉर्ड में पुराना मालिक ही रहेगा — खतौनी में उसी का नाम, Property Tax भी उसी के नाम पर आता रहेगा
- बिजली-पानी कनेक्शन में दिक्कत — नया मीटर लगवाने के लिए दाखिल खारिज का प्रूफ चाहिए
- Home Loan refinancing रुक जाएगा — बैंक खतौनी में नाम देखते हैं। नाम न हुआ तो लोन नहीं
- जमीन दोबारा बेचना मुश्किल — अगला खरीदार खतौनी चेक करेगा, पुराना नाम देखकर पीछे हट जाएगा
- सरकारी मुआवजा खतरे में — अगर NHAI, UPSIDA या कोई सरकारी एजेंसी जमीन ले, मुआवजा उसी को मिलेगा जिसका नाम खतौनी में है
- विरासत विवाद — मरने के बाद दाखिल खारिज न हो तो भाई-बहन या दूर के रिश्तेदार जमीन पर दावा ठोक सकते हैं
Amar Ujala की बड़ी रिपोर्ट — अब रजिस्ट्री के साथ ही ऑनलाइन कार्यवाही
"बैनामेदार को संपत्ति की रजिस्ट्री कराने के बाद दाखिल खारिज व नामांतरण के लिए अब तहसील का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। राजस्व परिषद ने नामांतरण वाद व दाखिल खारिज प्रक्रिया का सरलीकरण करते हुए संपत्ति की रजिस्ट्री होने के साथ ही इसकी कार्यवाही ऑनलाइन करने की व्यवस्था कर दी है।"
Amar Ujala की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्व परिषद की आयुक्त मनीषा त्रिघाटिया ने यह आदेश जारी किया था। नई व्यवस्था के तहत:
RCCMS System कैसे काम करता है?
- निबंधन कार्यालय (SRO) और पीठासीन अधिकारी के कोर्ट को लिंक कर दिया गया है
- रजिस्ट्री के समय ही दाखिल खारिज के लिए प्रार्थना पत्र RCCMS portal पर अपलोड हो जाता है
- नामांतरण वाद स्वत: दायर हो जाता है — आपको अलग से filing नहीं करनी पड़ती
- आप चाहें तो vaad.up.nic.in पर खुद भी आवेदन कर सकते हैं — दोनों विकल्प हैं
- पूरी प्रक्रिया अब online track हो जाती है
ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? पूरी प्रक्रिया Step-by-Step
चलिए, अब सबसे जरूरी हिस्से पर आते हैं — आपको खुद कैसे आवेदन करना है। Patrika और Amar Ujala की रिपोर्ट्स के आधार पर पूरी प्रक्रिया:
रजिस्ट्री के 30-45 दिन बाद आवेदन करें
Sub-Registrar Office (SRO) पर बैनामा हो गया? अब 30 से 45 दिन रुकिए। इससे पहले आवेदन करने पर system में registry का record अभी sync नहीं हुआ होता — delay हो सकती है। 90 दिन से ज्यादा भी मत रुकिए, वरना अलग से inquiry शुरू हो सकती है।
📍 Ideal समय: रजिस्ट्री के 30-45 दिन बादvaad.up.nic.in portal पर जाएं
Browser में vaad.up.nic.in खोलें। यह UP सरकार का official Revenue Court Management System है। मुख्य पेज पर लिखा होगा: "उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 धारा 34 के अन्तर्गत ऑनलाइन आवेदन"। उस link पर click करें।
📍 Official Portal: vaad.up.nic.in (UP Revenue Court)Mobile Number से Login करें
अपना mobile number डालें। OTP आएगा, उसे enter करें और Login दबाएं। Account बनाने की जरूरत नहीं — mobile-based OTP system है। एक बार login हो जाने के बाद registry details पूछी जाएंगी।
📍 OTP आपके registered mobile पर आएगारजिस्ट्री नंबर और तारीख भरें
अपनी रजिस्ट्री संख्या (Registry Number) और तारीख (Registration Date) डालकर Submit करें। बस इतना करते ही पूरी रजिस्ट्री और बैनामा का details screen पर आ जाएगा। सब कुछ verify कर लें, फिर Print निकाल लें।
📍 Registry number बैनामे के top पर मिलेगाशुल्क का भुगतान करें
Online payment करें UPI, Net Banking, Credit/Debit Card से। शुल्क प्रॉपर्टी की कीमत पर निर्भर करता है — ₹200 से ₹2,500 तक। छोटे प्लॉट के लिए ₹200, बड़ी प्रॉपर्टी के लिए ₹2,500 तक। Payment receipt save कर लें।
📍 Receipt और Application Number save करेंलेखपाल का Field Verification
आवेदन के बाद क्षेत्रीय लेखपाल (Village-level Revenue Officer) assign होता है। वो आपकी जमीन पर आकर physical inspection करेगा। पड़ोसियों से confirm करेगा कि आप ही actual owner हैं। चहारदीवारी (boundary) देखेगा। यह step 10-15 दिन में पूरा हो जाता है।
📍 Lekhpal cooperative रहें — objection न होतहसीलदार का Final Order
लेखपाल की report approval के साथ तहसीलदार के पास जाती है। अगर कोई objection नहीं है, तो UP Revenue Code धारा 34 के तहत mutation order pass हो जाता है। 7-10 दिन बाद खतौनी upbhulekh.gov.in पर आपके नाम से update हो जाती है।
📍 upbhulekh.gov.in पर खतौनी check करेंफीस कितनी? Property Value के हिसाब से
दाखिल खारिज की फीस आपकी जमीन की value पर depend करती है। BhoomiCheckKare की मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार:
| Property Value | Basic शुल्क | अन्य खर्च (Optional) |
|---|---|---|
| 5 लाख से कम | ₹200 | Document cost: ₹100-200 |
| 5-10 लाख | ₹500 | Stamp: ₹500-2,000 (if applicable) |
| 10 लाख से ज्यादा | ₹1,000-2,500 | Lawyer fee: ₹500-2,000 (optional) |
ध्यान दें: कुल मिलाकर ₹2,000 से ₹6,000 का खर्च आ सकता है अगर आप वकील की मदद लेते हैं। अकेले करें तो ₹200-2,500 में काम हो जाता है।
जरूरी दस्तावेज — Situation के हिसाब से
👉 सामान्य बिक्री (Sale Deed) के लिए
रजिस्ट्री के बाद दाखिल खारिज के लिए
- रजिस्टर्ड Sale Deed (बैनामा) — Original + Photocopy
- पुरानी खतौनी — जिसमें पुराने मालिक का नाम है
- खरीदार का Aadhaar और PAN
- विक्रेता का Aadhaar और PAN
- Property Tax Receipt (latest)
- Passport size photo
- Stamp duty receipt और e-stamp certificate
- दाखिल खारिज का application form (signed)
👉 विरासत / वारिसाना के लिए (2025 से सरल हुआ)
"विरासत प्रक्रिया आसान: अब वारिसाना दाखिल खारिज के लिए केवल मृत्यु प्रमाण पत्र और उत्तराधिकारियों का पहचान पत्र ही काफी है। पहले शपथपत्र और ग्राम पंचायत की रिपोर्ट अनिवार्य थी, जिसे हटा दिया गया है।"
विरासत-आधारित दाखिल खारिज के लिए (मृत्यु के बाद)
- मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate)
- वारिसों का पहचान पत्र (Aadhaar/Voter ID) — सभी वारिस चाहिए
- वंशावली (Family Tree) — Lekhpal या ग्राम प्रधान से certified
- अगर एक ही नाम पर mutation है, तो बाकी वारिसों का NOC
- पुरानी खतौनी
- मृतक से रिश्ते का शपथपत्र
👉 Gift Deed / Will के लिए
Gift / वसीयत से जमीन मिली तो
- Registered Gift Deed या Probated Will की copy
- मृत्यु प्रमाण पत्र (Will-based mutation के लिए)
- Receiver का Aadhaar और PAN
- पुरानी खतौनी
- Voluntary transfer का शपथपत्र
Timeline: कब क्या होगा?
SRO पर रजिस्ट्री हुई
Sub-Registrar Office पर बैनामा registered हुआ। Stamp duty और registration fees दी गई। रजिस्टर्ड Sale Deed मिल गई।
Online आवेदन करें
vaad.up.nic.in पर mobile OTP से login करें। registry details डालें। Documents upload करें। Fee pay करें। Application number मिलेगा tracking के लिए।
लेखपाल का Verification
Village-level Lekhpal आपकी जमीन पर आएगा। Physical inspection करेगा। Boundaries check करेगा। पड़ोसियों से confirm करेगा। Report तहसीलदार को भेजेगा।
Public Objection Period
तहसील office और गांव में Public Notice लगता है। 15-30 दिन में कोई objection तो नहीं — यह देखा जाता है। अगर objection नहीं है, case आगे बढ़ता है।
तहसीलदार का Final Order
तहसीलदार UP Revenue Code धारा 34 के तहत mutation order pass करते हैं। खतौनी upbhulekh.gov.in पर update हो जाती है। Mutation Certificate download करें — यह आपका proof है।
2025 के नए नियम: अब non-disputed cases में यह पूरी प्रक्रिया 30 दिन में complete करना अनिवार्य है (Source: Yugantar Pravah)।
5 बड़ी गलतियां — इनसे बचें
🚨 गलती 1 — रजिस्ट्री को पूरा ट्रांसफर मानना
सबसे common mistake। लोग सोचते हैं रजिस्ट्री के बाद जमीन पूरी उनकी हो गई। गलत। सरकारी रिकॉर्ड में अब भी पुराने मालिक का नाम है। जब तक दाखिल खारिज नहीं होगा, पूरी तरह आपकी नहीं मानी जाएगी।
🚨 गलती 2 — 6 महीने से ज्यादा टालना
बहुत लोग तब दाखिल खारिज कराते हैं जब बैंक loan चाहिए या जमीन बेचनी है। इतनी देरी में पुराने मालिक को ढूंढना मुश्किल हो सकता है, रिकॉर्ड में inheritance changes आ सकते हैं। रजिस्ट्री के 30-45 दिन बाद filing ideal है।
🚨 गलती 3 — गलत authority चुनना
Rural land की mutation तहसीलदार के पास होती है। LDA allotted flat का mutation LDA office में। Non-LDA urban property का mutation LMC में। गलत office में file की तो हफ्तों बाद application reject हो जाएगी।
🚨 गलती 4 — अधूरे वारिस के Documents
विरासत के मामले में सभी heirs का NOC या signature नहीं है तो rejection पक्की है। Informal family settlement से कभी काम नहीं चलता। Court-certified succession certificate या registered NOC ही चलेगा।
🚨 गलती 5 — Tehsildar order के बाद खतौनी verify न करना
Tehsildar का order मिला तो काम खत्म? नहीं। 7-10 दिन बाद खुद upbhulekh.gov.in पर जाकर देखें — क्या खतौनी actually आपके नाम पर update हुई है। कई बार order pass होने के बाद भी portal पर update नहीं होता। Follow-up करें।
Status कैसे Check करें?
आवेदन के बाद status track करना आसान है:
दाखिल खारिज का Status Check करने का तरीका
- Browser में vaad.up.nic.in खोलें
- Mobile number डालें, OTP से login करें
- रजिस्ट्री number और date डालें
- Status screen पर आ जाएगा — Pending, Lekhpal verification, Tehsildar approval, Complete
- खतौनी update check करने के लिए upbhulekh.gov.in पर District: Lucknow, Tehsil select करें, फिर Khasra number डालें
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