लखनऊ • 27 अक्टूबर 2026
मुख्य बातें
- बाराबंकी के घसारा गांव में चार बीघा ज़मीन का सौदा ₹86 लाख में तय हुआ।
- करीब ₹76 लाख बैंक खातों में और ₹10 लाख नकद दिए गए।
- बाद में पता चला कि ज़मीन बेचने वालों के नाम पर नहीं थी; पैसे वापस मांगने पर धमकी मिली।
- गुडंबा थाने में कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज; पुलिस जांच कर रही है।
मामला क्या है
दैनिक भास्कर के अनुसार 25 नवंबर 2024 को पीड़ित को घसारा गांव में आठ बीघा ज़मीन दिखाई गई, फिर उसमें से चार बीघा ₹86 लाख में खरीदने का सौदा तय हुआ। पीड़ित ने आरोपियों के बैंक खातों में करीब ₹76 लाख भेजे और ₹10 लाख नकद दिए। बाद में ज़मीन के मालिकाना हक पर शक होने पर उसने जानकारी जुटाई, तो पता चला कि ज़मीन आरोपियों के नाम पर थी ही नहीं। (दैनिक भास्कर, 27 अक्टूबर 2026)
पीड़ित ने 2 नवंबर 2025 को गुडंबा थाने में शिकायत दी थी; केस कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ। थाना प्रभारी अंजनी कुमार मिश्रा ने बताया कि जांच जारी है। आरोप साबित होना अभी बाकी है, इसलिए हम आरोपियों और पीड़ित के नाम नहीं दे रहे हैं।
खरीदारों के लिए इसका मतलब
- टोकन या कोई भी बड़ी रकम देने से पहले खतौनी में देखें कि ज़मीन सच में बेचने वाले के नाम पर दर्ज है, और खसरा/गाटा नंबर वही है जो मौके पर दिखाया गया: प्रॉपर्टी का असली मालिक कैसे जाँचें।
- ज़मीन पर पहले की रजिस्ट्री या बंधक की जाँच IGRSUP पर करें: IGRSUP पर रजिस्ट्री कैसे देखें।
- सिर्फ ज़मीन "दिखाने" या ज़ुबानी सौदे पर भुगतान न करें। पैसा उसी के खाते में दें जिसके नाम खतौनी है, और नकद से बचें; बैंक भुगतान का रिकॉर्ड बाद में सबूत बनता है।
- एग्रीमेंट या पावर ऑफ अटॉर्नी से मालिकाना हक नहीं मिलता, सिर्फ रजिस्टर्ड बैनामे से मिलता है: बैनामा, रजिस्ट्री और पावर ऑफ अटॉर्नी में फर्क।
- हाल का एक और मामला: अलीगंज की हाउसिंग कंपनी पर ₹30 लाख की ठगी का केस।
खरीदने से पहले जाँच कराएँ
खतौनी, रजिस्ट्री की चेन, भार-मुक्त प्रमाणपत्र (Encumbrance), LDA/जिला पंचायत की मंज़ूरी और कोर्ट केस — आवासीय प्लॉट और फ़्लैट के लिए ₹5,000, 48 घंटे में PDF रिपोर्ट। देखें हम क्या-क्या जाँचते हैं →