लखनऊ • 19 अक्टूबर 2026
मुख्य बातें
- कारोबार में साझेदारी और प्लॉट दिलाने का झांसा देकर पांच लोगों से ₹79.97 लाख ठगने के मामले चिनहट, विभूतिखंड और पारा थानों में दर्ज हुए।
- इनमें चार मामले प्लॉट के हैं। तीन में खरीदार से पूरी रकम लेकर रजिस्ट्री नहीं कराई गई।
- सबसे बड़ा मामला पारा का: बाज़ार से कम कीमत पर प्लॉट का झांसा देकर ₹38.34 लाख लिए गए।
- एक मामले में 2003 में बुक किए प्लॉट पर 2026 में किसी और ने कब्जा कर लिया; पुलिस से कार्रवाई न होने पर पीड़ित को कोर्ट जाना पड़ा।
प्लॉट से जुड़े चार मामले
| इलाका / थाना | रकम | क्या हुआ |
|---|---|---|
| मोहान रोड — पारा | ₹38.34 लाख | परिचितों ने बाज़ार से कम कीमत पर प्लॉट दिलाने की बात कही, प्लॉट दिखाया, सौदा तय हुआ; रकम लेने के बाद भी रजिस्ट्री नहीं कराई। |
| सरोजिनी नगर का खरीदार — विभूतिखंड | ₹9.75 लाख | प्लॉट के नाम पर रकम दी, रजिस्ट्री नहीं हुई। |
| चिनहट का खरीदार — विभूतिखंड | ₹8.73 लाख | 2024 में विभूतिखंड के एक बिल्डर कार्यालय से प्लॉट खरीदा; रजिस्ट्री उनके नाम नहीं की गई। |
| चिनहट (टेल्को के पास) | ₹60,000 | 2003 में एक हाउसिंग फाइनेंस कंपनी से प्लॉट बुक किया; जुलाई 2026 में कंपनी के ही कर्मचारी ने कब्जा कर लिया। थाने में सुनवाई न होने पर कोर्ट गए। |
पांचवां मामला (₹22.55 लाख) कारोबार में साझेदारी के नाम पर ठगी का है। विभूतिखंड के दोनों मामलों में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज हुई है। आरोपियों पर अभी सिर्फ आरोप हैं, इसलिए हम उनके नाम नहीं दे रहे। (अमर उजाला, 19 अक्टूबर 2026)
खरीदारों के लिए इसका मतलब
- पूरा पैसा रजिस्ट्री के दिन, सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में दें। उससे पहले सिर्फ बयाना, और वह भी रजिस्टर्ड एग्रीमेंट (इकरारनामा) के साथ — बैनामा, रजिस्ट्री और पावर ऑफ अटॉर्नी का फर्क।
- "बाज़ार से सस्ता प्लॉट" सबसे आम झांसा है। कीमत कम है तो वजह पूछें — अक्सर ज़मीन विवादित, सरकारी या किसी और के नाम होती है।
- प्लॉट देखना काफी नहीं — खतौनी में बेचने वाले का नाम, पिछली रजिस्ट्री की चेन और भार-मुक्त प्रमाणपत्र खुद मिलाएं।
- बिल्डर/कंपनी से बुकिंग कर रहे हैं तो पूछें कि ज़मीन कंपनी के नाम है या नहीं, और LDA से लेआउट पास है या नहीं — अवैध कॉलोनी कैसे पहचानें।
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स्रोत: अमर उजाला, 19 अक्टूबर 2026