लखनऊ • 22 अक्टूबर 2026

मुख्य बातें

  • आरोप: प्लॉट मालिक की पत्नी और दिवंगत पति, दोनों को मृत दिखाकर पति की संपत्ति का फर्जी वारिस प्रमाण पत्र बनवाया गया।
  • इन कूटरचित कागज़ों से गोमती नगर के विरामखंड का एक प्लॉट अपने नाम कराकर किसी और को बेच दिया गया।
  • पत्नी ने 27 जुलाई 2026 को शिकायत दी। गोमती नगर थाने में मुकदमा दर्ज है।
  • पुलिस ने 7 अक्टूबर को पहले और 21 अक्टूबर को दूसरे आरोपी को गिरफ्तार किया। बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।

क्या हुआ

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार शिकायतकर्ता ने 27 जुलाई 2026 को शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें और उनके दिवंगत पति को मृत दिखाकर पति की संपत्ति का फर्जी वारिस प्रमाण पत्र बनवाया गया। इन कूटरचित दस्तावेज़ों के ज़रिये गोमती नगर के विरामखंड स्थित एक प्लॉट को अपने नाम कराकर किसी और को बेच दिया गया। (दैनिक भास्कर, 22 अक्टूबर 2026)

गोमती नगर पुलिस ने 21 अक्टूबर को मुखबिर की सूचना पर 33 साल के एक आरोपी को बटलर रोड के पास से गिरफ्तार किया। इसी मामले में 7 अक्टूबर को एक और आरोपी जेल भेजा जा चुका है। जांच एक उपनिरीक्षक कर रहे हैं और पुलिस बाकी आरोपियों को तलाश रही है। ये अभी आरोप हैं; अदालत में साबित होना बाकी है।

रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि प्लॉट खरीदने वाले व्यक्ति की स्थिति क्या है। ऐसे मामलों में फर्जी कागज़ों पर हुई रजिस्ट्री रद्द हो सकती है, और खरीदार का पैसा फंस जाता है। इसी तरह के और मामले: प्लॉट के नाम पर ठगी, तीन थानों में मुकदमे।

खरीदारों के लिए इसका मतलब

  • विक्रेता को प्रॉपर्टी वरासत (विरासत) में मिली है तो सिर्फ वारिस प्रमाण पत्र पर भरोसा न करें। मूल मालिक का मृत्यु प्रमाण पत्र, नगर निगम/तहसील का नामांतरण आदेश और परिवार के बाकी वारिसों की सहमति देखें।
  • जिन वारिसों का नाम कागज़ में "मृत" लिखा है, क्या वे सच में नहीं हैं? पड़ोस और परिवार से पूछताछ करें। इस मामले में पत्नी ज़िंदा थीं।
  • वारिस प्रमाण पत्र तहसील से जारी होता है; उसकी सत्यता उसी दफ्तर से मिलवाएं। पूरी प्रक्रिया: मृत्यु के बाद प्रॉपर्टी ट्रांसफर गाइड (English)।
  • आम ठगी के तरीके और बचाव: लखनऊ के 10 बड़े प्रॉपर्टी फ्रॉड (English)।

खरीदने से पहले जाँच कराएँ

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स्रोत: दैनिक भास्कर, 22 अक्टूबर 2026