लखनऊ • 28 अक्टूबर 2026
मुख्य बातें
- वरुण विहार और नैमिष नगर में बल्क में ज़मीन खरीदने वालों को 60% तक छूट देने की तैयारी; एलडीए ने स्लैब बनाया है।
- प्रस्ताव: न्यूनतम 20 एकड़ पर 40%, और 50 एकड़ या ज़्यादा पर 60% तक छूट।
- शर्त: सड़क, पार्क, बिजली घर, एसटीपी, सीवर लाइन, पानी की लाइन और टंकी जैसी सुविधाएं खरीदार को खुद बनानी होंगी; एलडीए ये विकसित करके नहीं देगा।
- दोनों योजनाओं में ज़मीन खरीद का बजट ₹3,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹5,000 करोड़ करने की तैयारी।
- छूट का प्रस्ताव एलडीए बोर्ड में रखा जाएगा; मंज़ूरी के बाद ही लागू होगा।
बल्क खरीद पर छूट का स्लैब
| कितनी ज़मीन | प्रस्तावित छूट |
|---|---|
| न्यूनतम 20 एकड़ | 40% |
| 50 एकड़ या उससे ज़्यादा | 60% तक |
हिन्दुस्तान के अनुसार बल्क में ज़मीन खरीदने वालों के लिए सबसे अहम शर्त यह होगी कि उन्हें भूखंड पर ज़रूरी बुनियादी सुविधाओं का विकास खुद कराना होगा। एलडीए खरीदार को सड़क, पार्क, बिजली घर, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), सीवर लाइन, पानी की लाइन और पानी की टंकी जैसी सुविधाएं विकसित करके नहीं देगा। प्रस्ताव एलडीए की बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। (हिन्दुस्तान, लखनऊ प्रिंट संस्करण, 28 अक्टूबर 2026) रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि छूट किस दर पर लगेगी और ज़मीन किस उपयोग (आवासीय, ग्रुप हाउसिंग या व्यावसायिक) के लिए होगी।
ज़मीन खरीद का बजट ₹5,000 करोड़
हिन्दुस्तान के अनुसार एलडीए वरुण विहार और नैमिष नगर में ज़मीन खरीदने के लिए बजट बढ़ा रहा है। करीब ₹3,000 करोड़ का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर ₹5,000 करोड़ करने की तैयारी है। इससे प्राधिकरण किसानों को मुआवज़ा देकर ज़्यादा ज़मीन खरीद सकेगा और दोनों योजनाओं के विकास कार्य तेज़ होंगे। (हिन्दुस्तान, लखनऊ प्रिंट संस्करण, 28 अक्टूबर 2026) दूसरे चरण में दोनों योजनाओं में एक-एक हज़ार भूखंड आने हैं: दूसरे चरण में 2,000 भूखंड।
खरीदारों के लिए इसका मतलब
- यह छूट आम प्लॉट खरीदारों के लिए नहीं, बल्कि 20 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन लेने वाले डेवलपर या संस्थाओं के लिए है।
- छूट मंज़ूर हुई तो इन योजनाओं में निजी डेवलपर की टाउनशिप या ग्रुप हाउसिंग आ सकती है। ऐसे प्रोजेक्ट में फ्लैट या प्लॉट लेने से पहले देखें कि डेवलपर ने एसटीपी, सीवर और पानी की सुविधा बनाई है या नहीं, क्योंकि ये एलडीए नहीं बनाएगा।
- ऐसे किसी प्रोजेक्ट का यूपी रेरा नंबर और एलडीए से पास नक्शा ज़रूर मिलाएं; "एलडीए योजना के अंदर" होने से एलडीए की गारंटी नहीं मिलती।
- ज़मीन खरीद का बजट बढ़ने का मतलब है कि योजनाओं का दायरा बढ़ेगा। आसपास के गांवों में ज़मीन खरीदने से पहले देखें कि गाटा अधिग्रहण या योजना क्षेत्र में तो नहीं।
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स्रोत: हिन्दुस्तान, लखनऊ प्रिंट संस्करण, 28 अक्टूबर 2026