मृत्यु के बाद प्रॉपर्टी अपने नाम कैसे करें — लखनऊ गाइड 2026
अंतिम अपडेट: मार्च 2026 | स्रोत: UP Revenue Code 2006, Hindu Succession Act 1956, Indian Succession Act 1925, UP Stamp Act, IGR UP पोर्टल
⚖️ मृत्यु के बाद प्रॉपर्टी ट्रांसफर — ज़रूरी जानकारी एक नज़र में
सबसे ज़रूरी बात: लखनऊ में प्रॉपर्टी ट्रांसफर एक तय कानूनी प्रक्रिया है। सही कागज़ों के साथ और कोई विवाद न हो तो 30 से 60 दिन में काम हो जाता है। विवाद या अधूरे कागज़ों की वजह से यही काम 6 से 18 महीने भी खींच सकता है।
किसी अपने को खोने का दर्द बहुत बड़ा होता है। लेकिन उस मुश्किल घड़ी में भी कुछ ज़रूरी कागज़ी काम करने पड़ते हैं — और उनमें सबसे अहम है घर या ज़मीन को अपने नाम करवाना। अगर यह न हो तो न आप उस प्रॉपर्टी को बेच सकते हैं, न उस पर लोन ले सकते हैं, न नक्शा पास करवा सकते हैं।
यह गाइड आपके लिए है — आसान हिंदी में, बिना किसी उलझन के। हम आपको बताएंगे कि लखनऊ में यह काम कैसे होता है, कौन से कागज़ चाहिए, कितना खर्च आएगा और कितना समय लगेगा — सब कुछ UP के कानून के हिसाब से।
विषय-सूची
- प्रॉपर्टी किसे मिलेगी — UP का वारिस कानून
- 6 आसान कदम — मृत्यु प्रमाण पत्र से दाखिल-खारिज तक
- ज़रूरी कागज़ों की पूरी सूची
- खर्च और समय — क्या उम्मीद रखें
- वसीयत हो तो और न हो तो — क्या फ़र्क पड़ता है
- NRI के लिए खास नियम
- 5 गलतियाँ जो लखनऊ में काम अटकाती हैं
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. प्रॉपर्टी किसे मिलेगी — UP का वारिस कानून
कागज़ी काम शुरू करने से पहले यह समझना ज़रूरी है कि कानूनी तौर पर प्रॉपर्टी पाने का हक किसे है। यह तीन बातों पर निर्भर करता है — मृतक का धर्म, वसीयत है या नहीं, और वारिस किस श्रेणी में आते हैं।
हिंदू, सिख, जैन और बौद्धों के लिए — Hindu Succession Act 1956
यह कानून वारिसों को अलग-अलग श्रेणियों में बाँटता है। श्रेणी 1 (Class I) के वारिसों का हक सबसे पहले होता है — वे सब एक साथ और बराबर हिस्से में प्रॉपर्टी पाते हैं।
| श्रेणी | इसमें कौन आते हैं | प्राथमिकता | ध्यान दें |
|---|---|---|---|
| Class I (श्रेणी 1) | पति/पत्नी, बेटे, बेटियाँ, माँ, विधवा बहू, मृत बेटे/बेटी की संतान | सबसे पहले — बराबर हिस्सा | सभी एक साथ और बराबर हिस्से में पाते हैं |
| Class II (श्रेणी 2) | पिता, भाई-बहन, उनके बच्चे, नाती-पोते (तय श्रेणियाँ) | दूसरे — सिर्फ तब जब Class I में कोई न हो | पहली entry दूसरी को हटाती है |
| Agnates (पुरुष वंश के रिश्तेदार) | पुरुष वंश से जुड़े दूर के रिश्तेदार | तीसरे | Class I और II में कोई न हो तभी |
| Cognates (महिला वंश के रिश्तेदार) | महिला वंश से जुड़े दूर के रिश्तेदार | चौथे | सरकार से पहले अंतिम विकल्प |
Hindu Succession (Amendment) Act 2005 ने बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार दिया। यह तब भी लागू होता है जब पिता 2005 से पहले चल बसे हों — सुप्रीम कोर्ट ने Vineeta Sharma बनाम Rakesh Sharma (2020) में यह साफ़ किया। अगर लखनऊ में किसी ट्रांसफर में बेटी को हिस्सा नहीं दिया गया तो वह कानूनी चुनौती दे सकती है।
मुस्लिमों के लिए
मुस्लिम उत्तराधिकार इस्लामी कानून के अनुसार होता है। वसीयत न होने पर हिस्से तय हैं — पति/पत्नी को 1/4 या 1/8, बेटियों को बेटों का आधा हिस्सा। विवाद होने पर सिविल कोर्ट से उत्तराधिकार प्रमाण पत्र लिया जा सकता है।
ईसाई और अन्य के लिए — Indian Succession Act 1925
वसीयत न हो तो पति/पत्नी को एक-तिहाई और बाकी दो-तिहाई बच्चों में बराबर बँटता है। बच्चे न हों तो पति/पत्नी को आधा और बाकी नज़दीकी रिश्तेदारों को तय क्रम में मिलता है।
2. 6 आसान कदम — मृत्यु प्रमाण पत्र से दाखिल-खारिज तक
ये वही कदम हैं जो लखनऊ के तहसील दफ्तरों और नगर निगम में फॉलो होते हैं। इन्हें क्रम में ही करें — एक भी छोड़ा तो अटकाव होगा।
मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाएं 21 दिन का मौका
मृत्यु के 21 दिन के अंदर लखनऊ नगर निगम (शहरी इलाके के लिए) या ग्राम पंचायत (ग्रामीण इलाके के लिए) में रजिस्ट्रेशन करवाएं। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन crsorgi.gov.in पर होती है। 3 से 7 कार्य दिवसों में प्रमाण पत्र मिल जाता है। कम से कम 6 certified copies ज़रूर लें — हर दफ्तर में एक लगेगी। 21 दिन के बाद late fee लगती है और 30 दिन बाद District Registrar का आदेश चाहिए — इसलिए देर न करें।
तहसीलदार से कानूनी वारिस प्रमाण पत्र लें 7 से 30 दिन
जहाँ प्रॉपर्टी है वहाँ की तहसील में आवेदन करें — मृतक के निवास स्थान की नहीं। साथ लाएं: मृत्यु प्रमाण पत्र, सभी वारिसों के पहचान पत्र, रिश्ते का प्रमाण, पते का प्रमाण, और ₹100 के स्टांप पेपर पर नोटरी करवाया हुआ self-declaration। तहसीलदार सभी वारिसों को नोटिस देकर जाँच करते हैं और 7 से 30 दिन में प्रमाण पत्र जारी करते हैं। ज़्यादातर मामलों में सिर्फ यही काफी है — सिविल कोर्ट वाला उत्तराधिकार प्रमाण पत्र सिर्फ बैंक खाते या विवाद होने पर चाहिए।
Probate — सिर्फ तब जब registered वसीयत हो 30 से 90 दिन
अगर मृतक ने registered वसीयत छोड़ी है तो लखनऊ District Court से Probate के लिए आवेदन करें। Probate वसीयत को कानूनी मान्यता देता है। UP में यह हमेशा अनिवार्य नहीं है लेकिन करवाना समझदारी है — भविष्य के किसी भी विवाद से बचाता है। अगर वसीयत नहीं है तो यह कदम छोड़ दें।
बाकी वारिसों से NOC लें समय अलग-अलग
अगर प्रॉपर्टी सिर्फ एक वारिस के नाम करनी है और Class I में और भी वारिस हैं, तो हर वारिस से NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) चाहिए — ₹100 स्टांप पेपर पर नोटरी करवाया हुआ। यही सबसे ज़्यादा देरी का कारण बनता है क्योंकि सभी वारिसों का एक साथ उपलब्ध होना ज़रूरी है। विदेश में रहने वाले वारिस Indian Consulate से notarised NOC बनवा सकते हैं।
तहसील में दाखिल-खारिज के लिए आवेदन करें कानूनी समय-सीमा: 45 दिन
दाखिल-खारिज (Mutation) सबसे अहम कदम है — इससे सरकारी records में मालिक का नाम बदलता है। उसी तहसील में जहाँ प्रॉपर्टी है आवेदन दें। साथ लाएं: मृत्यु प्रमाण पत्र, कानूनी वारिस प्रमाण पत्र, original रजिस्ट्री, बाकी वारिसों के NOC, और तय फॉर्म पर आवेदन। UP Revenue Code 2006 की धारा 34 के अनुसार तहसीलदार को 45 दिन में दाखिल-खारिज पूरा करना ज़रूरी है। आवेदन की स्थिति upbhulekh.gov.in पर देख सकते हैं।
Sub-Registrar और LDA के records अपडेट करवाएं आखिरी कदम
दाखिल-खारिज के बाद Sub-Registrar के दफ्तर (जहाँ original रजिस्ट्री हुई थी) में भी records अपडेट करवाएं। LDA की प्रॉपर्टी हो (IT City, Vasant Kunj, Janakipuram आदि) तो LDA दफ्तर में भी अलग से यही काम करवाना ज़रूरी है — बहुत लोग यह भूल जाते हैं और बाद में बेचते वक्त अटकते हैं। Class I वारिसों के लिए यह मुफ्त है — कोई Stamp Duty नहीं।
3. ज़रूरी कागज़ों की पूरी सूची
एक भी कागज़ गायब हो तो दफ्तर आवेदन वापस कर देता है। पहले यह सूची पूरी करें, फिर किसी दफ्तर जाएं:
| कागज़ | कहाँ से मिलेगा | कितनी copies चाहिए | कहाँ लगेगा |
|---|---|---|---|
| मृत्यु प्रमाण पत्र | लखनऊ नगर निगम / crsorgi.gov.in | 6 certified copies | हर कदम पर |
| कानूनी वारिस प्रमाण पत्र | तहसील दफ्तर | 3 copies | दाखिल-खारिज, बैंक, Sub-Registrar |
| Original रजिस्ट्री (Property Deed) | परिवार के पास / Sub-Registrar दफ्तर | Original + 2 photocopies | दाखिल-खारिज, Sub-Registrar |
| सभी वारिसों के Aadhaar / PAN | UIDAI / Income Tax Dept | Self-attested copies | कानूनी वारिस प्रमाण पत्र, दाखिल-खारिज |
| खतौनी / खसरा (ज़मीन का record) | upbhulekh.gov.in या तहसील | 2 copies | ज़मीन/प्लॉट के दाखिल-खारिज के लिए |
| बाकी वारिसों का NOC | हर वारिस नोटरी करवाए | हर वारिस से original | दाखिल-खारिज (एक के नाम हो तो) |
| वसीयत (अगर हो) | परिवार के पास / registered copy | Original + 2 notarised copies | Probate, दाखिल-खारिज |
| Self-declaration affidavit | ₹100 स्टांप पेपर, नोटरी से | हर वारिस का 1 | कानूनी वारिस प्रमाण पत्र आवेदन |
| LDA allotment letter (LDA प्रॉपर्टी हो तो) | LDA दफ्तर / परिवार के पास | Original + 2 copies | LDA records अपडेट — ज़रूरी है |
| Property tax receipts | लखनऊ नगर निगम | पिछले 3 साल के | कब्ज़े का प्रमाण, दाखिल-खारिज |
अगर प्रॉपर्टी LDA ने allot की है (जैसे IT City, Vasant Kunj, Janakipuram की कोई scheme) तो तहसील में दाखिल-खारिज के बाद LDA दफ्तर में भी अलग से mutation order + कानूनी वारिस प्रमाण पत्र + original allotment letter लेकर records अपडेट करवाएं। बहुत लोग यह कदम छोड़ देते हैं — और जब वर्षों बाद प्रॉपर्टी बेचने या नक्शा पास करवाने जाते हैं तो records में गड़बड़ी की वजह से काम अटक जाता है।
4. खर्च और समय — क्या उम्मीद रखें
| काम | सरकारी शुल्क | समय | ध्यान दें |
|---|---|---|---|
| मृत्यु प्रमाण पत्र | ₹10 से ₹50 | 3 से 7 दिन | कुछ ULBs में 21 दिन के अंदर मुफ्त |
| कानूनी वारिस प्रमाण पत्र | ₹50 से ₹200 (affidavit: ₹100 stamp paper) | 7 से 30 दिन | UP e-district portal पर ट्रैक करें |
| उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (कोर्ट) | ~estate value का 3% | 3 से 12 महीने | सिर्फ विवाद या movable assets के लिए |
| Probate (वसीयत हो तो) | estate value पर आधारित court fee | 30 से 90 दिन | District Court, लखनऊ |
| NOC affidavits | ₹100 stamp paper + नोटरी ₹200-₹500 प्रति वारिस | 1 से 7 दिन प्रति वारिस | हर वारिस को अलग से साइन करना होगा |
| दाखिल-खारिज (Mutation) | ₹200 से ₹500 | 45 दिन (कानूनी समय-सीमा) | upbhulekh.gov.in पर ट्रैक करें |
| Sub-Registrar अपडेट | नाममात्र / मुफ्त (विरासत पर) | 1 से 3 दिन | Class I वारिसों को कोई Stamp Duty नहीं |
| LDA records अपडेट (लागू हो तो) | ₹500 से ₹1,000 | 15 से 30 दिन | सभी LDA प्रॉपर्टी के लिए ज़रूरी |
| कुल खर्च (सामान्य मामला) | ~₹1,500 से ₹3,000 | 30 से 60 दिन | वकील की फीस अलग: ₹10,000 से ₹30,000 |
विरासत में प्रॉपर्टी पाना बिल्कुल tax-free है। लेकिन जब आप वह प्रॉपर्टी बेचते हैं तो Capital Gains Tax लगता है। खरीद की कीमत वह मानी जाएगी जो मृत्यु की तारीख को उस प्रॉपर्टी की बाज़ार कीमत थी — न कि पहले मालिक ने जितने में खरीदी थी। विरासत के 24 महीने के अंदर बेचें तो Short Term Capital Gains (आपके income tax slab के हिसाब से), बाद में बेचें तो Long Term Capital Gains (20% with indexation या 12.5% without — Budget 2024 के अनुसार)। बेचने से पहले एक CA से सलाह लें — सही timing से अच्छा-खासा टैक्स बच सकता है।
5. वसीयत हो तो और न हो तो — क्या फ़र्क पड़ता है
| बात | Registered वसीयत हो तो | वसीयत न हो (Intestate) |
|---|---|---|
| प्रॉपर्टी किसे मिलेगी | वसीयत में जो लिखा है उसके अनुसार | सभी Class I वारिसों में कानून के अनुसार बराबर |
| समय कितना लगेगा | कम — आमतौर पर 1 से 3 महीने | ज़्यादा — सब सहमत हों तो 2 से 6 महीने; विवाद हो तो 1 से 3 साल |
| Probate चाहिए? | सुझाया जाता है (UP में हमेशा अनिवार्य नहीं) | लागू नहीं |
| कोर्ट की ज़रूरत | सिर्फ तब जब वसीयत को चुनौती दी जाए | विवाद होने पर ज़रूरी |
| NOC चाहिए? | आमतौर पर नहीं (अगर वसीयत साफ हो) | हाँ — हर Class I वारिस से |
| विवाद का खतरा | कम (registered और साफ वसीयत हो तो) | ज़्यादा — खासकर बड़े परिवारों में |
| क्या करना चाहिए | Probate लें → दाखिल-खारिज करवाएं | कानूनी वारिस प्रमाण पत्र + NOC → दाखिल-खारिज |
लखनऊ के बहुत से परिवारों के पास हाथ से लिखी, बिना registered वसीयत होती है। यह कानूनी तौर पर मान्य है — लेकिन इसे court में चुनौती देना बहुत आसान है। कोई भी वारिस इसे reject कर सकता है और मामला सिविल कोर्ट में जा सकता है जहाँ सालों लग सकते हैं। आगे के लिए सीख: वसीयत Sub-Registrar दफ्तर में register करवाएं — खर्च सिर्फ ₹200 से ₹500, एक दिन में काम। यह एक कदम सबसे बड़े झगड़े से बचाता है।
6. NRI के लिए खास नियम
विदेश में रहने वाले लखनऊ के बहुत से परिवार DSD Properties से पूछते हैं कि क्या वे यहाँ की प्रॉपर्टी विरासत में ले सकते हैं। कानून क्या कहता है — यहाँ है:
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NRI कोई भी प्रॉपर्टी विरासत में ले सकते हैं — RBI की अनुमति नहीं चाहिए
रिहायशी, commercial और खेती की ज़मीन — सब कुछ NRI बिना Reserve Bank of India की इजाज़त के विरासत में ले सकते हैं। FEMA (Foreign Exchange Management Act) साफ कहता है कि विरासत इस नियम से बाहर है।
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NRI खेती की ज़मीन खरीद नहीं सकते — लेकिन विरासत में ले सकते हैं
यह बात बहुत लोग नहीं जानते। NRI भारत में खेती की या बागान की ज़मीन खरीद नहीं सकते। लेकिन विरासत में पा सकते हैं। हाँ — उस ज़मीन को बेचने के लिए RBI की अनुमति ज़रूरी होगी।
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NOC विदेश से भी sign हो सकता है
अगर NRI वारिस को NOC देनी है तो वे अपने देश के Indian Consulate या Embassy से notarised NOC बनवा सकते हैं। यह apostilled document लखनऊ के तहसील दफ्तरों में मान्य होता है।
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Power of Attorney — लखनऊ न आ सकें तो यह करें
जो NRI खुद लखनऊ नहीं आ सकते वे किसी भरोसेमंद परिवार के सदस्य या वकील को registered Power of Attorney (PoA) दे सकते हैं। PoA विदेश में notarised करवाकर लखनऊ Sub-Registrar दफ्तर में register करवानी होगी — उसके बाद वह व्यक्ति आपकी जगह सारे काम कर सकता है।
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प्रॉपर्टी बेचें तो पैसे विदेश कैसे भेजें
NRI विरासत में मिली प्रॉपर्टी बेचने के बाद हर वित्तीय वर्ष में 10 लाख USD तक अपने देश भेज सकते हैं — लागू टैक्स और TDS कटने के बाद। CA से Form 15CA/15CB भरवाएं। खरीदार TDS काटेगा — LTCG पर 20% या STCG पर 30%।
7. 5 गलतियाँ जो लखनऊ में काम अटकाती हैं
21 दिन की समय-सीमा सख्त है। उसके बाद late fee लगती है। 30 दिन बाद District Registrar का आदेश चाहिए। 1 साल बाद Magistrate का आदेश चाहिए — जो महीनों में मिलता है। मृत्यु होते ही यह पहला काम करें — इसके बिना एक भी अगला कदम नहीं उठ सकता।
लखनऊ के बहुत से परिवार original रजिस्ट्री अपने पास रख लेते हैं और सोचते हैं कि वे मालिक हो गए। यह गलत है। दाखिल-खारिज के बिना सरकारी records में अभी भी मृतक का नाम है। आप न बेच सकते हैं, न loan ले सकते हैं, न नक्शा पास करवा सकते हैं, न utilities अपने नाम कर सकते हैं। दाखिल-खारिज optional नहीं है।
तहसील में दाखिल-खारिज और LDA में records अपडेट — ये दो अलग-अलग काम हैं। तहसील का दाखिल-खारिज होने के बाद LDA allotted प्रॉपर्टी (IT City, किसी भी LDA sector) के लिए LDA दफ्तर में भी अलग से documents देने होते हैं। यह न करने पर records में अंतर आ जाता है जो सालों बाद बेचते या नक्शा पास करवाते वक्त सामने आता है।
अगर NOC के बिना दाखिल-खारिज का आवेदन दे दिया तो तहसील सभी वारिसों को नोटिस भेजती है। कोई भी वारिस आपत्ति करे तो मामला Revenue Court में जाता है — और वहाँ 1 से 2 साल लग सकते हैं। पहले सभी NOC इकट्ठे करें, फिर आवेदन दें।
कुछ परिवार दाखिल-खारिज के बिना ही original रजिस्ट्री + मृत्यु प्रमाण पत्र + कानूनी वारिस प्रमाण पत्र दिखाकर प्रॉपर्टी बेचने की कोशिश करते हैं। खरीदार के वकील यह reject कर देंगे — कोई भी बैंक ऐसी property पर home loan नहीं देगा। हमेशा दाखिल-खारिज पूरा करने के बाद ही बेचें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
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लखनऊ में मृत्यु के बाद प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने का पहला कदम क्या है?
सबसे पहले मृत्यु के 21 दिन के अंदर लखनऊ नगर निगम में मृत्यु रजिस्ट्रेशन करवाएं। crsorgi.gov.in पर ऑनलाइन भी होती है। कम से कम 6 certified copies लें — हर दफ्तर में एक लगेगी। बिना इस कागज़ के कोई भी अगला काम नहीं होगा।
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कानूनी वारिस प्रमाण पत्र और उत्तराधिकार प्रमाण पत्र में क्या अंतर है?
कानूनी वारिस प्रमाण पत्र तहसीलदार देते हैं — 7 से 30 दिन में मिलता है, कम खर्च, और UP में ज़मीन-मकान के दाखिल-खारिज के लिए काफी है। उत्तराधिकार प्रमाण पत्र सिविल कोर्ट से मिलता है — बैंक खाते, शेयर, FD जैसी movable property के लिए या विवाद होने पर ज़रूरी है। लखनऊ में ज़्यादातर प्रॉपर्टी ट्रांसफर के लिए कानूनी वारिस प्रमाण पत्र ही काफी होता है।
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दाखिल-खारिज में कितना समय लगता है?
UP Revenue Code 2006 के अनुसार तहसीलदार को आवेदन के 45 दिन में दाखिल-खारिज पूरा करना है। सामान्य मामलों में 30 से 60 दिन लगते हैं। विवाद हो, कागज़ अधूरे हों या कोई वारिस उपलब्ध न हो तो 6 से 18 महीने भी लग सकते हैं। अपना आवेदन upbhulekh.gov.in पर ट्रैक करें।
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क्या विरासत में मिली प्रॉपर्टी पर Stamp Duty देनी होगी?
नहीं — UP में जब Class I वारिसों (पति/पत्नी, बच्चे, माता-पिता) को प्रॉपर्टी विरासत में मिलती है, चाहे वसीयत से हो या बिना वसीयत के, कोई Stamp Duty नहीं लगती। Stamp Duty तब लगती है जब आप वह प्रॉपर्टी बेचते हैं — पुरुषों के लिए 7%, महिलाओं के लिए 6%, और 1% registration charge।
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वसीयत नहीं है और कई वारिस हैं — क्या करें?
वसीयत न होने पर Hindu Succession Act 1956 के अनुसार सभी Class I वारिसों को बराबर हिस्सा मिलता है। अगर एक वारिस पूरी प्रॉपर्टी लेना चाहे तो बाकी सभी वारिसों से notarised NOC लेनी होगी। सहमति न बने तो सिविल कोर्ट में बंटवारे का मुकदमा करना होगा जिसमें 2 से 5 साल लग सकते हैं। इसीलिए जीते-जी registered वसीयत बनवाना सबसे समझदारी है।
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क्या NRI लखनऊ में प्रॉपर्टी विरासत में ले सकते हैं?
हाँ — NRI बिना RBI की अनुमति के कोई भी प्रॉपर्टी विरासत में ले सकते हैं। NOC और Power of Attorney वे अपने देश के Indian Consulate से बनवा सकते हैं। प्रॉपर्टी बेचने पर वे हर वित्तीय वर्ष में 10 लाख USD तक अपने देश भेज सकते हैं — लागू टैक्स काटने के बाद।
सबसे ज़रूरी बात
लखनऊ में मृत्यु के बाद प्रॉपर्टी ट्रांसफर एक तय कानूनी प्रक्रिया है — इसमें कोई मनमानी नहीं है। कदम साफ हैं, दाखिल-खारिज की 45 दिन की समय-सीमा कानूनी है, और एक सामान्य मामले में पूरा खर्च ₹3,000 से कम है। जो मामले सालों खिंचते हैं वे लगभग हमेशा इन्हीं वजहों से होते हैं: NOC का न होना, बिना register वसीयत, LDA records का न बदलवाना, या मृत्यु रजिस्ट्रेशन में देरी।
जल्दी करें, सभी NOC पहले इकट्ठे करें, 21 दिन में मृत्यु register करवाएं, और दाखिल-खारिज ऑनलाइन ट्रैक करें। कोई विवाद लगे तो पहले एक property lawyer से मिलें — Revenue Court जाने से पहले।
21 दिन के अंदर: लखनऊ नगर निगम में मृत्यु register करवाएं। 6 certified copies लें।
30 दिन के अंदर: तहसील में कानूनी वारिस प्रमाण पत्र के लिए आवेदन दें। साथ ही सभी वारिसों से NOC इकट्ठे करें।
60 दिन के अंदर: दाखिल-खारिज का आवेदन दें। upbhulekh.gov.in पर status ट्रैक करते रहें।
दाखिल-खारिज के बाद: Sub-Registrar के records अपडेट करवाएं। LDA प्रॉपर्टी हो तो LDA दफ्तर में भी अलग से करवाएं।
बेचने से पहले: CA से Capital Gains Tax की timing पर सलाह लें — सही वक्त पर बेचने से अच्छा-खासा टैक्स बच सकता है।
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Anjali Singh , AUTHOR
Anjali Singh is an expert in commercial properties, office spaces, and retail projects across Uttar Pradesh. With a keen eye for business growth opportunities, she assists startups and corporates in securing the right locations for long-term success.