लखनऊ • 21 अक्टूबर 2026

मुख्य बातें

  • पूरन नगर जोधा खेड़ा में खसरा संख्या 01एस राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है।
  • आरोप है कि इस ज़मीन को खसरा संख्या 3एस बताकर प्लॉटिंग की जा रही है और भूखंड बेचे जा रहे हैं। ज़मीन पर करीब 11 साल से कब्जे का आरोप भी है।
  • शिकायत पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं पूर्व सांसद प्रो. रीता बहुगुणा जोशी ने 6 अक्टूबर 2026 को की थी।
  • एलडीए उपाध्यक्ष के निर्देश पर जोन-2 के जोनल अधिकारी (प्रवर्तन) ने सहायक अभियंता और अवर अभियंता से तीन दिन में मौका-जांच रिपोर्ट मांगी है।

शिकायत क्या है

हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार पूरन नगर जोधा खेड़ा में खसरा संख्या-01एस राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है। आरोप है कि इस ज़मीन पर करीब 11 वर्षों से अवैध कब्जा किया जा रहा है, और इसे खसरा संख्या-3एस बताकर प्लॉटिंग और भूखंड बेचने का काम चल रहा है। प्रो. रीता बहुगुणा जोशी ने 6 अक्टूबर 2026 को इसकी शिकायत कर जांच और कार्रवाई की मांग की थी।

एलडीए उपाध्यक्ष के निर्देश पर जोन-2 के जोनल अधिकारी (प्रवर्तन) देवांश त्रिवेदी ने एक सहायक अभियंता और एक अवर अभियंता को जांच सौंपी है। उन्हें तुरंत मौके का निरीक्षण कर तीन दिन के भीतर विस्तृत आख्या देने को कहा गया है। जांच से पता चलेगा कि तालाब के रूप में दर्ज ज़मीन पर कब्जे और खसरा बदलकर प्लॉटिंग में कौन-कौन शामिल है। (हिन्दुस्तान)

जांच रिपोर्ट आने पर हम यह खबर अपडेट करेंगे।

खरीदारों के लिए इसका मतलब

  • तालाब, चारागाह, खलिहान या ग्राम समाज की ज़मीन निजी तौर पर बेची नहीं जा सकती। ऐसे प्लॉट की रजिस्ट्री हो भी जाए, तब भी कब्जा और निर्माण दोनों खतरे में रहते हैं।
  • खसरा नंबर बदलकर ज़मीन बेचना आम तरीका है। बेचने वाला जो खसरा नंबर बताए, उसी नंबर की खतौनी में ज़मीन की श्रेणी और मालिक देखें। फिर लेखपाल से पैमाइश कराकर मिलाएं कि मौके पर वही ज़मीन है: ज़मीन का मालिकाना रिकॉर्ड कैसे जांचें।
  • आसपास नीची ज़मीन, पानी भराव या पुराना तालाब दिखे तो पुराने राजस्व नक्शे (शजरा) में उस जगह की स्थिति ज़रूर देखें।
  • बिना स्वीकृत लेआउट की कॉलोनियों की पहचान: अवैध कॉलोनी कैसे पहचानें।

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स्रोत: हिन्दुस्तान