Home About Articles Properties RERA Projects LDA Schemes Market Updates
Updated: Jun 24, 2026 5 min read Property Law All Articles

यूपी रियल एस्टेट गाइड 2026: जिला पंचायत प्लॉट का पूरा कानूनी सच — RERA, LDA, धारा 80 और म्यूटेशन (Lucknow)

स्रोत: रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 एवं उत्तर प्रदेश रेरा नियमावली, 2016; उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 (धारा 34 म्यूटेशन, धारा 80 भू-उपयोग परिवर्तन); उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 (धारा 213); UP-RERA (up-rera.in); उत्तर प्रदेश कैबिनेट निर्णय एवं पंचायती राज विभाग की प्रस्तावित उपविधि से जुड़ी समाचार रिपोर्ट्स (जून 2026, अमर उजाला)। यह लेख सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। शुल्क/प्रक्रिया की पुष्टि आधिकारिक स्रोत से करें।

ℹ️ इस गाइड में क्या पक्का है, क्या प्रस्तावित

पक्का (कानून): RERA की अनिवार्यता, धारा 80, और रजिस्ट्री के बाद म्यूटेशन की जरूरत — ये स्थापित कानून हैं। कैबिनेट राहत: जिला पंचायत नक्शों का नियमितीकरण एक पुष्ट निर्णय है, जिसकी कट-ऑफ 31 मार्च 2026 है। प्रस्तावित: ‘मॉडल भवन उपविधि 2026’ अभी ड्राफ्ट चरण में है (लागू नहीं); उसके 15%/20%/7.5 मीटर जैसे आंकड़े अपेक्षित हैं और अंतिम अधिसूचना पर निर्भर हैं। निवेश से पहले आधिकारिक स्थिति की पुष्टि करें।

लखनऊ के सुल्तानपुर रोड, अयोध्या/फैजाबाद रोड या रायबरेली रोड के बाहरी इलाकों में सस्ता प्लॉट देखते समय आपने यह तिहरा झांसा जरूर सुना होगा — “सर, यह जिला पंचायत क्षेत्र है, यहां न LDA की जरूरत, न RERA की, और न रजिस्ट्री के बाद किसी म्यूटेशन की।”

यह तीनों बातें कानूनी रूप से गलत हैं — और यही गलतफहमी हर साल हजारों खरीदारों की गाढ़ी कमाई फंसा देती है। इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण रियल एस्टेट को लेकर कई बड़े फैसले भी लिए हैं। इस एक ही गाइड में हम पूरा कानूनी सच एक साथ समझेंगे: RERA, नया प्रस्तावित बायलॉज 2026, कैबिनेट का नियमितीकरण फैसला, और धारा 80 व म्यूटेशन का असली गणित।

लखनऊ के लिए यह विषय और भी अहम है। शहर की सीमाएं मास्टर प्लान 2031 के तहत तेजी से फैली हैं, और सुल्तानपुर रोड, अयोध्या रोड, रायबरेली रोड, देवा रोड तथा काकोरी, मोहनलालगंज, बीकेटी जैसे इलाकों में सबसे ज्यादा ‘जिला पंचायत अप्रूव्ड’ प्लॉटिंग हुई है। इन्हीं क्षेत्रों में बहुमंजिला अपार्टमेंट, मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेज, होटल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स भी बने हैं, जिनकी वैधता पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। इसलिए लखनऊ के उपनगरीय खरीदार के लिए इन नियमों को ठीक से समझना सीधे उसकी पूंजी की सुरक्षा से जुड़ा है।

500 वर्ग मी / 8RERA की सीमा (इससे ऊपर अनिवार्य)
31 मार्च 2026कैबिनेट नियमितीकरण कट-ऑफ
477 गांवLDA सीमा में, लखनऊ लाभार्थी
धारा 80 + 34भू-उपयोग और म्यूटेशन के नियम

⚠️ पूरी गाइड का सार — 5 बिंदुओं में

  • RERA हर बड़े प्रोजेक्ट पर लागू है — जिला पंचायत क्षेत्र में भी, अगर 500 वर्ग मीटर से बड़ा या 8 से अधिक प्लॉट
  • नया बायलॉज 2026 प्रस्तावित है — लागू होने पर ग्रामीण प्लॉटिंग के मानक सख्त होंगे (अपेक्षित प्रावधान)
  • कैबिनेट ने पुराने नक्शे वैध किए — 31 मार्च 2026 तक के, रजिस्ट्रेशन और शुल्क के साथ
  • धारा 80 जरूरी है — कृषि भूमि पर निर्माण से पहले अकृषक घोषणा अनिवार्य
  • रजिस्ट्री काफी नहीं — मालिकाना रिकॉर्ड के लिए म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) भी जरूरी है

1. पहला सच: क्या जिला पंचायत क्षेत्र में RERA लागू होता है?

RERA (Real Estate Regulation Act, 2016) एक केंद्रीय कानून है, जो उत्तर प्रदेश रेरा नियमावली, 2016 (नियम 1(3)) के अनुसार पूरे राज्य पर समान रूप से लागू होता है। कानून में कहीं नहीं लिखा कि विकास प्राधिकरण की सीमा खत्म होते ही RERA खत्म हो जाता है। चाहे जमीन शहर में हो या जिला पंचायत के किसी सुदूर गांव में — व्यावसायिक प्लॉटिंग पर RERA लागू होता है, बशर्ते वह इन शर्तों को पूरा करे।

1A

प्रोजेक्ट का आकार — 500 वर्ग मीटर

कानून: धारा 3(2)(a) 500 वर्ग मी से अधिक

यदि विकसित की जा रही जमीन/टाउनशिप का कुल क्षेत्रफल 500 वर्ग मीटर से अधिक है, तो जिला पंचायत क्षेत्र में भी RERA रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। कानून में “या” शब्द है — आकार या यूनिट, इनमें से कोई एक शर्त भी पूरी होने पर रजिस्ट्रेशन जरूरी।

1B

प्लॉट/यूनिट की संख्या — 8 से अधिक

कानून: धारा 3 8 से अधिक यूनिट

यदि प्रोजेक्ट में बेचे जाने वाले प्लॉट/अपार्टमेंट की संख्या 8 से अधिक है, तो आकार चाहे जो हो, RERA अनिवार्य है। यानी खेत खरीदकर सड़क-नाली-बिजली के खंभे लगाकर 10, 20 या 50 प्लॉट काटने वाला बिल्डर जिला पंचायत क्षेत्र में होने के बावजूद बिना RERA नंबर के विज्ञापन या बिक्री नहीं कर सकता। ऐसे प्रोजेक्ट अवैध माने जाते हैं।

विस्तार से: जिला पंचायत और RERA पर हमारा अलग गाइड (नीचे लिंक)

2. नया (प्रस्तावित) कानून: मॉडल भवन उपविधि 2026

उत्तर प्रदेश का पंचायती राज विभाग जिला पंचायत क्षेत्रों के लिए “मॉडल भवन निर्माण एवं विकास उपविधि-2026” तैयार कर रहा है, जो आवास विभाग की 2025 मॉडल उपविधि पर आधारित है। ध्यान दें — यह अभी प्रस्तावित (ड्राफ्ट) है, लागू नहीं। नीचे दिए आंकड़े अपेक्षित हैं और अंतिम अधिसूचना पर बदल सकते हैं। इस नियमावली का मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में अव्यवस्थित और अवैध प्लॉटिंग पर रोक लगाना, नक्शा स्वीकृति में पारदर्शिता लाना और जिला पंचायतों की आय बढ़ाना बताया गया है। लागू होने पर इसका सीधा असर लखनऊ के बाहरी इलाकों के डेवलपर्स और खरीदारों, दोनों पर पड़ेगा।

संक्षेप में: नीचे दिए 15%, 20% और 7.5 मीटर जैसे प्रावधान अंतिम कानून नहीं, बल्कि अपेक्षित दिशा हैं — आधिकारिक अधिसूचना आने पर इनकी पुष्टि करें।

2A

15% ग्रीन/ओपन एरिया (अपेक्षित)

प्रस्तावित पर्यावरण संतुलन

अपेक्षा है कि आवासीय परियोजनाओं में कुल भूमि का लगभग 15% और व्यावसायिक में लगभग 10% हिस्सा पार्क/हरियाली के लिए छोड़ना अनिवार्य होगा, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े मास्टर प्लान पार्क नहीं होते।

2B

20% भूखंड बंधक (अपेक्षित)

प्रस्तावित खरीदार सुरक्षा

अपेक्षा है कि डेवलपर को कुल विक्रय योग्य क्षेत्रफल का लगभग 20% भूखंड जिला पंचायत के पास बंधक रखना होगा, जिसे वह तभी बेच पाएगा जब सड़क, सीवर, बिजली पूरी कर कंप्लीशन सर्टिफिकेट ले ले। इससे बिल्डर के अधूरा छोड़कर भागने पर रोक लगेगी।

2C

सड़कों की चौड़ाई (अपेक्षित)

प्रस्तावित 7.5 मीटर +

संभावना है कि आंतरिक सड़क की न्यूनतम चौड़ाई लगभग 7.5 मीटर (करीब 25 फीट) होगी, बशर्ते उसकी लंबाई एक तय सीमा (लगभग 300 मीटर) के भीतर हो; लंबाई बढ़ने पर 9 या 12 मीटर। बाहरी एप्रोच रोड UP Road Side Control Rules, 1964 और PWD मानकों के अनुसार तय होगी।

3. कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला: पुराने नक्शे होंगे वैध

सीमाओं के विस्तार (जैसे लखनऊ मास्टर प्लान 2031) के कारण जिला पंचायत के जो पुराने नक्शे विकास प्राधिकरणों (जैसे LDA) की सीमा में आ गए थे, उन पर सीलिंग/ध्वस्तीकरण का खतरा था। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के निर्णय के अनुसार, अब 31 मार्च 2026 तक जिला पंचायत से स्वीकृत आवासीय और व्यावसायिक नक्शे प्राधिकरण क्षेत्र में भी वैध (Regularized) माने जाएंगे।

फैसले की मुख्य बातें

  • सीलिंग/ध्वस्तीकरण नहीं: पात्र भवनों पर अब कार्रवाई नहीं होगी
  • रजिस्ट्रेशन + निर्धारित शुल्क: राहत स्वतः नहीं — प्राधिकरण में आवेदन और शुल्क जरूरी
  • लैंड यूज समायोजन: मास्टर प्लान में ‘कृषि/हरित’ दर्ज होने पर भी जिला पंचायत के अनुसार भू-उपयोग समायोजित किया जाएगा; लैंड यूज के विपरीत निर्माण पर अतिरिक्त शुल्क
  • लखनऊ में लाभ: LDA सीमा में शामिल लगभग 477 गांव; बैंक लोन और खरीद-बिक्री आसान
  • आगे: 31 मार्च 2026 के बाद इन क्षेत्रों में नया नक्शा सीधे प्राधिकरण से ही लेना होगा

4. म्यूटेशन और धारा 80 का असली कानूनी गणित

यहां सबसे खतरनाक भ्रम फैलाया जाता है — “अप्रूव्ड/RERA प्लॉट की रजिस्ट्री हो गई तो म्यूटेशन की जरूरत नहीं, रजिस्ट्री ही सब कुछ है।” यह कानूनी रूप से गलत है। इसे ठीक से समझें।

4A

पहले धारा 80 — कृषि से अकृषक

कानून: UP राजस्व संहिता धारा 80 SDM कोर्ट

लखनऊ के बाहरी इलाकों की ज्यादातर जमीन मूल रूप से कृषि भूमि है। उस पर मकान/दुकान बनाने या वैध प्लॉटिंग से पहले SDM कोर्ट से धारा 80 (पुरानी धारा 143) के तहत उसे “गैर-कृषि (अकृषक)” घोषित कराना अनिवार्य है। बिना धारा 80 के, रजिस्ट्री हो जाने पर भी आपको वहां वैध आवासीय निर्माण का अधिकार नहीं मिलता।

4B

रजिस्ट्री काफी नहीं — म्यूटेशन भी जरूरी

कानून: UP राजस्व संहिता धारा 34 दाखिल-खारिज

रजिस्ट्री (Sale Deed) मालिकाना हक का हस्तांतरण करती है, पर सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि “रजिस्ट्री के बाद सब हो गया”। सरकारी रिकॉर्ड में नाम बदलने के लिए दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) कराना जरूरी है। बिना म्यूटेशन के टैक्स, सरकारी रिकॉर्ड और भविष्य की बिक्री में दिक्कतें आती हैं।

4C

म्यूटेशन कहां होगा — क्षेत्राधिकार पर निर्भर

तहसील / प्राधिकरण / नगर निगम

यह इस पर निर्भर करता है कि जमीन किसके दायरे में है: तहसील (तहसीलदार) — राजस्व/ग्रामीण भूमि के लिए (धारा 34); विकास प्राधिकरण (जैसे LDA) — अपनी आवंटित/स्वीकृत संपत्तियों के लिए; और नगर निगम (LMC) — नगर निगम सीमा की संपत्तियों के लिए (उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 213 के तहत), जो मुख्यतः गृह कर/जल कर रिकॉर्ड के लिए होता है।

इसलिए सही सवाल यह नहीं कि “म्यूटेशन होगा या नहीं”, बल्कि यह कि “यह किस कार्यालय में होगा”। म्यूटेशन को कभी न छोड़ें — यही आगे चलकर साफ रिकॉर्ड, लोन और दोबारा बिक्री में काम आता है।

हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट किया कि केवल बकाया कर के आधार पर नगर निगम म्यूटेशन रोक नहीं सकता — यानी म्यूटेशन एक वैधानिक प्रक्रिया है जो लागू होती है।

यह भ्रम फैलता क्यों है? इसका एक कारण यह है कि जब कृषि भूमि धारा 80 के तहत अकृषक होकर कॉलोनी/आबादी में बदल जाती है, तो उसके छोटे प्लॉट पुरानी कृषि खतौनी में उसी तरह दर्ज नहीं रहते जैसे खेती की जमीन। इससे कुछ लोग मान बैठते हैं कि “अब म्यूटेशन होता ही नहीं”। सच यह है कि रिकॉर्ड का स्थान बदल जाता है — मालिकाना/कर रिकॉर्ड अब संबंधित प्राधिकरण या नगर निगम के पास अपडेट होता है, तहसील की कृषि खतौनी में नहीं। पर रिकॉर्ड अपडेट कराना (म्यूटेशन) फिर भी जरूरी रहता है। इसे “जरूरत ही नहीं” समझ लेना सबसे महंगी गलती साबित हो सकती है।

5. खरीद से पहले 5 अचूक विधिक जांच (Due Diligence)

लखनऊ या यूपी के किसी भी जिला पंचायत क्षेत्र में प्लॉट लेने से पहले इन 5 बिंदुओं की जांच जरूर करें।

1
UP-RERA रजिस्ट्रेशन

बड़े प्रोजेक्ट में बिल्डर से RERA नंबर मांगें और up-rera.in पर खुद वेरीफाई करें कि प्रोजेक्ट रजिस्टर्ड है और स्टेटस क्या है।

📍 up-rera.in
2
धारा 80 आदेश पत्र

SDM कोर्ट द्वारा जारी धारा 80 (गैर-कृषि) का मूल आदेश पत्र मांगें और खतौनी/भूलेख में उसकी प्रविष्टि जांचें।

📍 खतौनी/भूलेख प्रविष्टि
3
क्षेत्राधिकार और कैबिनेट राहत

पता करें कि गांव विकास प्राधिकरण के मास्टर प्लान में आ चुका है या नहीं। अगर हां, तो जांचें कि निर्माण/नक्शा 31 मार्च 2026 से पहले का है (कैबिनेट नियमितीकरण के दायरे में)।

📍 मास्टर प्लान 2031 ज़ोनिंग
4
स्वीकृत लेआउट और म्यूटेशन की स्थिति

जिला पंचायत/प्राधिकरण से पास असली लेआउट देखें और चेक करें कि प्लॉट नंबर उसमें है। रजिस्ट्री के बाद उपयुक्त कार्यालय में म्यूटेशन की स्थिति भी देखें।

📍 स्वीकृत लेआउट + म्यूटेशन रिकॉर्ड
5
बैंक प्रोजेक्ट लोन

जांचें कि प्रोजेक्ट पर SBI, PNB, HDFC, ICICI जैसे प्रतिष्ठित बैंकों से प्रोजेक्ट लोन मिल रहा है या नहीं। बैंक की मंजूरी कानूनी वैधता का मजबूत संकेत है।

📍 बैंक approved-projects सूची

डीलर के सबसे आम झांसे

🚨 “जिला पंचायत में RERA की जरूरत नहीं”

बड़े व्यावसायिक प्लॉटिंग प्रोजेक्ट पर जिला पंचायत क्षेत्र में भी RERA अनिवार्य है। बिना RERA बिक्री गैरकानूनी है।

🚨 “रजिस्ट्री हो गई, म्यूटेशन की जरूरत नहीं”

गलत। रजिस्ट्री के बाद उपयुक्त कार्यालय (तहसील/प्राधिकरण/नगर निगम) में म्यूटेशन कराना जरूरी है, वरना रिकॉर्ड, टैक्स और भविष्य की बिक्री में दिक्कत आएगी।

🚨 “नया बायलॉज आ गया, सब वैध है”

मॉडल भवन उपविधि 2026 अभी प्रस्तावित है, लागू नहीं। इसके नाम पर किया गया कोई दावा अभी अंतिम नहीं माना जा सकता।

🚨 “धारा 80 की जरूरत नहीं”

कृषि भूमि पर निर्माण से पहले धारा 80 अनिवार्य है। बिना इसके रजिस्ट्री के बावजूद वैध निर्माण का अधिकार नहीं मिलता।

DSD Properties आपकी कैसे मदद करता है

इन सभी नियमों की जांच एक आम खरीदार के लिए मुश्किल है। DSD Properties की Rs 5,000 वाली वेरिफिकेशन सेवा किसी भी लखनऊ प्रॉपर्टी की पूरी कानूनी तस्वीर 48 घंटे में देती है।

हमारी रिपोर्ट में क्या शामिल है

  • RERA स्थिति — up-rera.in पर प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन और शर्तें
  • धारा 80 और भूलेख — कृषि/अकृषक दर्जा और खतौनी में मालिकाना हक
  • क्षेत्राधिकार और कैबिनेट राहत पात्रता — जमीन प्राधिकरण सीमा में है या जिला पंचायत में, और 31 मार्च 2026 कट-ऑफ की पात्रता
  • स्वीकृत लेआउट और म्यूटेशन — प्लॉट नंबर का मिलान और म्यूटेशन की स्थिति
  • अवैध कॉलोनी क्रॉस-चेक और साफ गैप रिपोर्ट

निष्कर्ष

रियल एस्टेट में निवेश आपकी जिंदगी का बड़ा वित्तीय फैसला है। “ग्रामीण या जिला पंचायत क्षेत्र में RERA, धारा 80 या म्यूटेशन की जरूरत नहीं” — इस झांसे में कभी न आएं। कानून सबके लिए बराबर है। कैबिनेट की राहत और प्रस्तावित बायलॉज 2026 स्वागत योग्य कदम हैं, पर इनका लाभ भी तभी मिलेगा जब आपकी संपत्ति पात्र और दस्तावेज पूरे हों। 2-4 लाख सस्ता प्लॉट पाने के लालच में किसी विवादित या अवैध प्रोजेक्ट में पैसा फंसाने के बजाय, हमेशा धारा 80 पास, RERA पंजीकृत और सही म्यूटेशन वाली संपत्ति में ही निवेश करें। आधिकारिक स्थिति की पुष्टि करें। सतर्क रहें, विधिक रूप से जागरूक रहकर सुरक्षित निवेश करें।

संबंधित विस्तृत गाइड (DSD Properties)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या जिला पंचायत क्षेत्र के प्लॉट के लिए RERA जरूरी है?

हाँ, अगर वहां व्यावसायिक प्लॉटिंग हो रही है और प्रोजेक्ट 500 वर्ग मीटर से बड़ा है या उसमें 8 से अधिक प्लॉट/यूनिट हैं। RERA एक्ट 2016 पूरे उत्तर प्रदेश पर लागू होता है (UP RERA नियमावली, नियम 1(3)), किसी एक शहर या प्राधिकरण तक सीमित नहीं। जिला पंचायत में RERA नहीं लगता — यह एक आम झूठ है।

क्या मॉडल भवन उपविधि 2026 लागू हो चुकी है?

नहीं। समाचार रिपोर्ट्स के अनुसार यह अभी प्रस्तावित (ड्राफ्ट) चरण में है और हितधारकों से चर्चा कर अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके 15% ग्रीन एरिया, 20% बंधक और 7.5 मीटर सड़क जैसे आंकड़े अपेक्षित हैं, जो मुख्यतः विकास प्राधिकरणों की 2025 मॉडल उपविधि पर आधारित हैं और अंतिम अधिसूचना में बदल सकते हैं।

कैबिनेट राहत की कट-ऑफ डेट क्या है?

रिपोर्ट्स के अनुसार कट-ऑफ डेट 31 मार्च 2026 है। 31 मार्च 2026 तक जिला पंचायत से स्वीकृत आवासीय और व्यावसायिक नक्शे, जो विकास प्राधिकरण (जैसे LDA) की सीमा में आ चुके हैं, वैध माने जाएंगे। इसके बाद इन क्षेत्रों में नए निर्माण के लिए सीधे प्राधिकरण से नक्शा लेना होगा। लखनऊ में LDA सीमा के लगभग 477 गांवों को इसका लाभ मिलेगा।

क्या कैबिनेट राहत अपने आप मिल जाएगी?

नहीं। राहत का लाभ लेने के लिए भवन स्वामी को संबंधित विकास प्राधिकरण में रजिस्ट्रेशन कराना और निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। नक्शे के अनुरूप बने निर्माण पर पहले जैसा भारी जुर्माना/शमन शुल्क नहीं लिया जाएगा, पर मास्टर प्लान लैंड यूज के विपरीत निर्माण पर अतिरिक्त शुल्क लग सकता है। सटीक शुल्क शासनादेश के अनुसार होगा।

क्या रजिस्ट्री के बाद म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) जरूरी है?

हाँ। यह सबसे बड़ी गलतफहमी है कि रजिस्ट्री के बाद म्यूटेशन की जरूरत नहीं। रजिस्ट्री मालिकाना हक का हस्तांतरण करती है, पर सरकारी रिकॉर्ड में नाम बदलने के लिए म्यूटेशन कराना जरूरी है (UP राजस्व संहिता धारा 34)। बिना म्यूटेशन के टैक्स, रिकॉर्ड और भविष्य की बिक्री में दिक्कत आती है।

अकृषक या RERA प्लॉट का म्यूटेशन कहां होता है?

यह जमीन के क्षेत्राधिकार पर निर्भर करता है। राजस्व/ग्रामीण भूमि का म्यूटेशन तहसील (तहसीलदार) में धारा 34 के तहत होता है; विकास प्राधिकरण (जैसे LDA) अपनी आवंटित/स्वीकृत संपत्तियों का म्यूटेशन करता है; और नगर निगम सीमा की संपत्तियों का म्यूटेशन नगर निगम (LMC) में उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 213 के तहत होता है, जो मुख्यतः गृह कर रिकॉर्ड के लिए है। सही सवाल यह है कि म्यूटेशन कहां होगा, न कि होगा या नहीं।

धारा 80 क्या है और यह क्यों जरूरी है?

धारा 80 (पुरानी धारा 143) उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 का प्रावधान है, जिसके तहत कृषि भूमि को SDM कोर्ट से गैर-कृषि (अकृषक) घोषित कराया जाता है। कृषि भूमि पर मकान, दुकान या वैध प्लॉटिंग से पहले यह अनिवार्य है। बिना धारा 80 के, रजिस्ट्री होने के बावजूद वहां वैध आवासीय निर्माण का अधिकार नहीं मिलता।

RERA से छूट किन परिस्थितियों में मिलती है?

मुख्यतः तीन स्थितियों में: शुद्ध कृषि भूमि की सीधी बिक्री जब कोई लेआउट या सुविधा न बनाई गई हो; छोटा प्रोजेक्ट जो 500 वर्ग मीटर या उससे छोटा हो और जिसमें 8 या उससे कम यूनिट हों; और व्यक्तिगत रीसेल जब कोई व्यक्ति अपना पुराना मकान/पुश्तैनी प्लॉट सीधे बेच रहा हो और कोई बिल्डर शामिल न हो।

क्या नया बायलॉज 2026 आने पर RERA की जरूरत खत्म हो जाएगी?

नहीं। बायलॉज 2026 (प्रस्तावित) और RERA अलग-अलग हैं। जिला पंचायत से लेआउट पास होने के बाद भी, यदि प्रोजेक्ट 500 वर्ग मीटर से बड़ा है या उसमें 8 से अधिक यूनिट हैं, तो UP-RERA में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य रहेगा। दोनों एक दूसरे की जगह नहीं ले सकते।

क्या DSD Properties खरीद से पहले इन सभी बिंदुओं की जांच करता है?

हाँ। DSD Properties की वेरिफिकेशन टीम up-rera.in पर RERA स्थिति, धारा 80 और भूलेख, जमीन का क्षेत्राधिकार व कैबिनेट राहत पात्रता (31 मार्च 2026 कट-ऑफ), स्वीकृत लेआउट का मिलान, म्यूटेशन की स्थिति और अवैध कॉलोनी क्रॉस-चेक — सब कुछ खरीद से पहले Rs 5,000 में 48 घंटे की रिपोर्ट के साथ जांचती है।

Disclaimer: The information on this website is shared for general awareness about property and real estate, collected from various reports and news sources. While we strive to provide accurate and updated details, we do not guarantee the completeness, accuracy, or reliability of the content. We are not responsible for any financial, legal, or property-related decisions made based on this information. For accurate details, please verify with the concerned authorities before proceeding.
S

Sanjay Kumar

Author · DSD Properties

Sanjay Kumar is a property legal advisor with deep expertise in documentation, registrations, and dispute resolution. With more than 15 years in the field, he ensures that every property transaction is safe, compliant, and stress-free for his clients.

Leave a Comment

Google Reviews

5.0

10 reviews

S

Shivam Kumar

Jun 2026

Very transparent and quick verification reports for plots. Totally worth it.

K

Krishna Yadav

Jun 2026

Best team in Lucknow to check if your property documents are genuine or not. Highly recommend.

K

Kushal Singh

Jul 2026

They have been very helpful and knowledgeable.

S

Surendra Pratap

Jun 2026

A genuinely honest and dedicated platform. Great respect for quality of information available on the site and guidance provided... Wishing you a bright future

P

Prashant Shukla

Jun 2026

These are Trustworthy people and they provide professional legal advisory services. They have friendly approach towards me.

R

Rishit Tandon

Jun 2026

Helpful and Genuine advisor for plots and govt related real estate schemes

A

Arpita Jaiswal

Jun 2026

Genuine content for Property buyers in lucknow. Provide solutions for all your queries related to properties in lucknow specially LDA approved.

T

Tripti Agarwal

Jun 2026

Information is accurate and the guidance given by team is very helpful.

M

Manoj Mendole

May 2026

Sometimes you connect with the right people at the right time. I was confused about whether to invest or wait. After talking to them, I got a much clearer pictu...

M

Mridul Goswami

May 2026

Before buying property, I contacted them through their website. My experience was very smooth. The information they provide is accurate and easy to understand....

Buy Property Sell Property