RERA नंबर कब तक वैध रहता है? बिल्डर देरी करे तो एक्सपायरी, रिन्यूअल और आपके अधिकार (UP 2026)
स्रोत: रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 — धारा 4(2)(l)(C) (कम्प्लीशन डेट घोषणा), धारा 6 (एक्सटेंशन), धारा 7 (पंजीकरण रद्द), धारा 8 (एसोसिएशन द्वारा पूर्ति), धारा 18 (रिफंड/ब्याज), धारा 59 (दंड); उत्तर प्रदेश रेरा नियमावली, 2016; UP-RERA (up-rera.in)। यह लेख सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं।
गेटेड टाउनशिप या अपार्टमेंट में निवेश करते समय सबसे पहले हम RERA रजिस्ट्रेशन नंबर देखते हैं और मान लेते हैं कि अब हमारी कमाई सुरक्षित है। लेकिन क्या आप जानते हैं — यह RERA नंबर हमेशा के लिए वैध नहीं होता? मोबाइल रिचार्ज की तरह इसकी भी एक तय एक्सपायरी डेट होती है।
अक्सर बिल्डर 3 साल में पजेशन का वादा करते हैं, पर प्रोजेक्ट 5-6 साल खिंच जाता है। ऐसे में खरीदार के मन में डर बैठ जाता है — “अगर RERA नंबर एक्सपायर हो गया, तो क्या प्रोजेक्ट अवैध हो जाएगा? क्या RERA अथॉरिटी अब हमारी मदद नहीं करेगी?”
अच्छी खबर यह है कि कानून पूरी तरह खरीदार के पक्ष में खड़ा है। इस गाइड में हम RERA रजिस्ट्रेशन की वैधता, एक्सपायरी, एक्सटेंशन (रिन्यूअल) और देरी होने पर खरीदार के कानूनी अधिकारों को — 100% सही कानूनी प्रावधानों के साथ — आसान भाषा में समझेंगे।
लखनऊ के संदर्भ में यह और जरूरी है। शहीद पथ, सुल्तानपुर रोड और अयोध्या रोड जैसे कॉरिडोर पर पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी टाउनशिप और अपार्टमेंट प्रोजेक्ट लॉन्च हुए, जिनमें से कुछ में पजेशन तय समय से सालों आगे खिसका। ऐसे में हर खरीदार को यह पता होना चाहिए कि RERA नंबर की एक्सपायरी का असल मतलब क्या है, और देरी की स्थिति में वह कानूनन क्या-क्या मांग सकता है।
⚠️ एक मिनट में पूरा सार
- RERA नंबर की वैधता बिल्डर द्वारा घोषित प्रोजेक्ट कम्प्लीशन डेट तक होती है (पोर्टल पर “Valid Up To”)
- एक्सपायर होना = प्रोजेक्ट अवैध होना नहीं — खरीदार का RERA संरक्षण बना रहता है
- धारा 6: फोर्स मेज्योर में अधिकतम 1 साल का एक्सटेंशन; इससे आगे का रास्ता धारा 7(3) है
- 1 साल से आगे: आमतौर पर खरीदारों (एसोसिएशन) की सहमति जरूरी
- देरी पर अधिकार (धारा 18): ब्याज सहित रिफंड, या पजेशन के साथ देरी का ब्याज
1. RERA नंबर की वैधता कैसे तय होती है?
जब कोई डेवलपर UP-RERA पर प्रोजेक्ट रजिस्टर करता है, तो उसे धारा 4(2)(l)(C) के तहत एक “प्रोजेक्ट कम्प्लीशन डेट” घोषित करनी होती है — यानी प्रोजेक्ट पूरा करने की अंतिम तारीख। RERA अथॉरिटी उसी तारीख तक रजिस्ट्रेशन को वैध मानती है।
“Valid Up To” ही असली एक्सपायरी डेट है
UP-RERA की वेबसाइट पर किसी प्रोजेक्ट का नंबर सर्च करने पर आपको “Registration Valid Up To” तारीख साफ दिखती है। यही उस प्रोजेक्ट के RERA नंबर की एक्सपायरी डेट है। बिल्डर के ब्रोशर या जुबानी वादे पर नहीं — हमेशा इसी पोर्टल वाली तारीख पर भरोसा करें। यह तारीख इसलिए अहम है क्योंकि बिल्डर की कानूनी जवाबदेही — जैसे समय पर पजेशन और देरी पर ब्याज — इसी घोषित तिथि से नापी जाती है। बुकिंग के समय यह तारीख और उसके साथ दर्ज प्रोजेक्ट की प्रगति, दोनों का स्क्रीनशॉट सुरक्षित रख लें, ताकि भविष्य में किसी विवाद में यह सबूत के तौर पर काम आ सके।
2. समय बीतने पर क्या RERA नंबर एक्सपायर हो जाता है?
हाँ — यदि बिल्डर तय तारीख तक प्रोजेक्ट पूरा नहीं करता और वह तारीख निकल जाती है, तो तकनीकी रूप से वह रजिस्ट्रेशन “एक्सपायर्ड” की श्रेणी में आ जाता है। पर यहाँ सबसे जरूरी बात समझें:
कई बिल्डर खरीदारों को डराने के लिए इसका उल्टा इस्तेमाल करते हैं — “नंबर एक्सपायर हो गया, अब RERA में कुछ नहीं होगा, चुपचाप इंतजार करो।” यह झूठ है। एक्सपायरी बिल्डर की कमजोरी है, खरीदार की नहीं। रजिस्ट्रेशन की अवधि बीतने से बिल्डर की जवाबदेही और बढ़ जाती है, क्योंकि उसने अपनी ही घोषित समय-सीमा तोड़ी है।
एक्सपायरी का सही मतलब
- प्रोजेक्ट अवैध नहीं होता — सिर्फ रजिस्ट्रेशन की अवधि समाप्त होती है
- खरीदार का संरक्षण खत्म नहीं होता — RERA के तहत आपके अधिकार बने रहते हैं
- बिल्डर के पास दो ही रास्ते बचते हैं — या तो एक्सटेंशन/रिन्यूअल कराए, या रद्दीकरण व कार्रवाई का सामना करे
3. एक्सटेंशन और रिन्यूअल के असली नियम
धारा 6: अधिकतम 1 साल का एक्सटेंशन
धारा 6 के अनुसार, यदि बिल्डर किसी फोर्स मेज्योर (युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, चक्रवात, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा) या किसी वाजिब कारण से काम पूरा नहीं कर पाया, तो वह एक्सटेंशन मांग सकता है। पर कानून साफ कहता है — धारा 6 के तहत कुल मिलाकर अधिकतम 1 वर्ष का ही एक्सटेंशन मिल सकता है, और इसके लिए निर्धारित फीस देनी होती है। बिना सुनवाई का मौका दिए आवेदन रद्द नहीं किया जा सकता।
1 साल से आगे: धारा 7(3) और खरीदारों की सहमति
यदि 1 साल के एक्सटेंशन के बाद भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं होता, तो धारा 6 से और समय नहीं मिल सकता। इसके बाद का रास्ता धारा 7(3) है, जिसके तहत अथॉरिटी पंजीकरण रद्द करने के बजाय उसे शर्तों के साथ जारी रहने दे सकती है। व्यवहार में इसके लिए खरीदारों (Association of Allottees) की सहमति जरूरी होती है — आमतौर पर दो-तिहाई (2/3) खरीदारों का प्रस्ताव कि बिल्डर को ही प्रोजेक्ट पूरा करने दिया जाए। बिना खरीदारों की सहमति के अथॉरिटी आसानी से आगे समय नहीं बढ़ाती।
यानी 1 साल तक का फैसला अथॉरिटी का; उससे आगे की कुंजी खरीदारों के हाथ में।4. बिना रिन्यूअल काम रोकने वाले बिल्डर पर कार्रवाई
कई बिल्डर न पजेशन देते हैं, न रजिस्ट्रेशन रिन्यू कराते हैं। ऐसे डिफॉल्टर बिल्डर के खिलाफ RERA में सख्त प्रावधान हैं।
🚨 भारी जुर्माना (धारा 59)
बिना वैध पंजीकरण के प्रोजेक्ट की मार्केटिंग या नए प्लॉट/फ्लैट बेचना प्रतिबंधित है। ऐसा करने पर प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत का 10% तक जुर्माना लग सकता है; बार-बार उल्लंघन/आदेश न मानने पर जेल तक का प्रावधान है।
🚨 प्रोजेक्ट खाता फ्रीज
रद्दीकरण की स्थिति में अथॉरिटी निर्देश देकर प्रोजेक्ट का बैंक/एस्क्रो खाता फ्रीज करा सकती है, ताकि बिल्डर जनता का पैसा निकालकर न भाग सके।
🚨 पंजीकरण रद्द और प्रोजेक्ट टेकओवर (धारा 7 व 8)
गंभीर मामलों में अथॉरिटी धारा 7 के तहत पंजीकरण रद्द कर सकती है और धारा 8 के तहत खरीदारों के एसोसिएशन को बाकी निर्माण पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपने की सुविधा दे सकती है।
5. पजेशन में देरी पर खरीदार के 3 बड़े अधिकार (धारा 18)
यदि बिल्डर तय तारीख तक पजेशन नहीं देता या लगातार तारीखें टालता है, तो धारा 18 आपको ये अधिकार देती है।
ब्याज सहित पूरा रिफंड
यदि आप अब प्रोजेक्ट में नहीं रहना चाहते, तो RERA में केस दाखिल कर अपनी पूरी जमा रकम ब्याज सहित वापस पा सकते हैं। ब्याज दर आमतौर पर SBI की सर्वोच्च MCLR + 2% के अनुसार तय होती है (नियमावली के अनुसार), जो प्रभावी रूप से एक अच्छी-खासी सालाना दर बनती है।
देरी का मुआवजा (पजेशन लेने पर)
यदि आप रिफंड नहीं, बल्कि प्लॉट/फ्लैट का पजेशन ही चाहते हैं, तो जितने समय प्रोजेक्ट लेट हुआ, उतने समय का ब्याज (Delay Interest) बिल्डर को आपको देना होगा — यह नकद या आपकी बकाया किश्त में समायोजित किया जा सकता है।
अतिरिक्त नुकसान का मुआवजा
देरी के कारण यदि आप किराये के मकान में रह रहे हैं या आपको अन्य वित्तीय नुकसान हुआ है, तो आप RERA/अधिकरण के समक्ष अतिरिक्त मुआवजे का दावा भी कर सकते हैं। हर केस के तथ्यों के आधार पर इस पर निर्णय होता है।
एक उदाहरण से समझें: देरी होने पर क्या करें
मान लीजिए आपने 2022 में लखनऊ के किसी RERA रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक किया, जिसकी घोषित कम्प्लीशन डेट दिसंबर 2025 थी। आज वह तारीख निकल चुकी है, पर पजेशन नहीं मिला। अब आपके पास साफ रास्ते हैं:
कदम दर कदम क्या करें
- पहले स्थिति जांचें: up-rera.in पर देखें कि प्रोजेक्ट की “Valid Up To” क्या है और बिल्डर ने एक्सटेंशन (धारा 6) लिया है या नहीं
- लिखित में याद दिलाएं: बिल्डर को ईमेल/पत्र से पजेशन और देरी-ब्याज की मांग दर्ज कराएं — यह आगे सबूत बनता है
- तय करें — रिफंड या पजेशन: अगर भरोसा टूट गया है तो धारा 18 के तहत ब्याज सहित रिफंड का दावा करें; अगर फ्लैट चाहिए तो देरी की पूरी अवधि का ब्याज मांगें
- ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें: समाधान न मिलने पर UP-RERA पोर्टल पर औपचारिक शिकायत दाखिल करें
- एसोसिएशन बनाएं: कई खरीदार मिलकर Association of Allottees बनाएं — इससे एक्सटेंशन पर सहमति और प्रोजेक्ट टेकओवर जैसे फैसलों में आपकी सामूहिक ताकत बढ़ती है
ध्यान दें — देरी का ब्याज पाने का अधिकार तब भी बना रहता है जब रजिस्ट्रेशन तकनीकी रूप से एक्सपायर हो चुका हो। एक्सपायरी बिल्डर की जिम्मेदारी कम नहीं करती, बल्कि उस पर दबाव बढ़ाती है।
एस्क्रो (70%) नियम क्यों आपकी ढाल है
RERA की धारा 4 के तहत बिल्डर को ग्राहकों से लिए पैसे का 70% एक अलग एस्क्रो खाते में रखना होता है, जिसका इस्तेमाल केवल उसी प्रोजेक्ट के निर्माण और जमीन की लागत के लिए हो सकता है। यह नियम एक्सपायरी और देरी के मामलों में आपकी सबसे बड़ी ढाल है।
एस्क्रो आपको कैसे बचाता है
- पैसा प्रोजेक्ट में ही रहता है — बिल्डर एक प्रोजेक्ट का पैसा दूसरी जगह नहीं लगा सकता, जिससे काम रुकने का जोखिम घटता है
- रद्दीकरण पर नियंत्रण — पंजीकरण रद्द होने पर अथॉरिटी इस खाते को फ्रीज कराकर पैसे की सुरक्षा कर सकती है
- टेकओवर में मदद — धारा 8 के तहत एसोसिएशन को काम सौंपे जाने पर यही फंड निर्माण पूरा करने में काम आता है
रिफंड लें या पजेशन का इंतजार करें?
देरी की स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यही होता है — पैसा वापस लेकर निकल जाएं, या ब्याज लेकर फ्लैट का इंतजार करें? दोनों के अपने फायदे हैं, और सही फैसला आपकी स्थिति पर निर्भर करता है।
रिफंड कब बेहतर है
अगर प्रोजेक्ट सालों से अटका है, निर्माण की गति लगभग शून्य है, बिल्डर की साख खराब है, या आपको पैसे की तत्काल जरूरत है — तो ब्याज सहित रिफंड समझदारी भरा रास्ता है। इससे आपकी पूंजी मुक्त होकर किसी सुरक्षित, सक्रिय प्रोजेक्ट में लग सकती है।
पजेशन का इंतजार कब ठीक है
अगर निर्माण लगभग पूरा है, इलाके में संपत्ति की कीमत काफी बढ़ चुकी है, और बिल्डर सक्रिय रूप से काम कर रहा है — तो पजेशन लेना बेहतर हो सकता है, क्योंकि देरी का ब्याज भी आपको मिलेगा और बढ़ी हुई कीमत का लाभ भी। ऐसे में एसोसिएशन बनाकर सामूहिक दबाव और निगरानी रखना फायदेमंद रहता है।
हर केस के तथ्य अलग होते हैं — बड़ी रकम फंसी हो तो किसी अनुभवी प्रॉपर्टी वकील से सलाह जरूर लें।6. बुकिंग से पहले सुरक्षा चेकलिस्ट
RERA एंड-डेट खुद देखें
बिल्डर के ब्रोशर की नहीं, सीधे up-rera.in पर जाकर प्रोजेक्ट की “Valid Up To” तारीख और स्टेटस देखें।
📍 up-rera.in — प्रोजेक्ट सर्चएग्रीमेंट फॉर सेल में देरी-ब्याज लिखवाएं
अनुबंध/रजिस्ट्री में साफ लिखवाएं कि तय समय पर पजेशन न देने पर बिल्डर RERA के नियमानुसार ब्याज देने के लिए उत्तरदायी होगा।
📍 Agreement for Sale की शर्तेंएक्सपायर्ड प्रोजेक्ट में बुकिंग न करें
यदि वैधता तिथि निकल चुकी है और बिल्डर के पास नया एक्सटेंशन लेटर नहीं है, तो वहां नया निवेश न करें जब तक स्थिति साफ न हो।
📍 एक्सटेंशन/रिन्यूअल लेटरDSD Properties आपकी कैसे मदद करता है
RERA स्टेटस, एक्सपायरी और एक्सटेंशन की सही पड़ताल एक आम खरीदार के लिए मुश्किल है। DSD Properties की Rs 5,000 वाली वेरिफिकेशन सेवा यह सब 48 घंटे में साफ करती है।
हमारी रिपोर्ट में क्या शामिल है
- RERA रजिस्ट्रेशन और “Valid Up To” — प्रोजेक्ट वैध है या एक्सपायर/एक्सटेंडेड
- प्रोजेक्ट की प्रगति और शिकायतें — पोर्टल पर दर्ज स्थिति और लंबित शिकायतें
- एग्रीमेंट की समीक्षा — देरी-ब्याज और पजेशन शर्तें सही हैं या नहीं
- क्षेत्राधिकार और भूमि जांच — धारा 80, भूलेख और लेआउट की पुष्टि
- साफ गैप रिपोर्ट — बुकिंग से पहले कौन से जोखिम हैं
निष्कर्ष
RERA नंबर का एक्सपायर होना खरीदार के लिए डरने की बात नहीं, बल्कि यह बिल्डर के गले की फांस है। कानून पूरी तरह खरीदार के पक्ष में है — धारा 6 में सीमित एक्सटेंशन, धारा 7(3) में खरीदारों की सहमति, और धारा 18 में रिफंड व मुआवजे का अधिकार। यदि आपका बिल्डर समय बीतने के बाद भी हीला-हवाली कर रहा है, तो चुप बैठने के बजाय UP-RERA की वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। याद रखें — आपके पास सबूत जितने मजबूत होंगे (बुकिंग दस्तावेज, भुगतान रसीदें, एग्रीमेंट, ईमेल पत्राचार), आपका केस उतना मजबूत होगा। बड़ी रकम फंसी हो तो किसी अनुभवी प्रॉपर्टी वकील से सलाह लें और जहां संभव हो, अन्य खरीदारों के साथ मिलकर एसोसिएशन बनाकर आगे बढ़ें। और नया निवेश हमेशा वैध, सक्रिय RERA पंजीकरण वाले प्रोजेक्ट में ही करें। सतर्क रहें, विधिक रूप से जागरूक रहकर सुरक्षित निवेश करें।
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