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Updated: Aug 17, 2026 4 min read Legal Advice All Articles

जिला पंचायत में नक्शा कैसे पास करें? धारा 80 क्यों है जरूरी — UP गाइड 2026

स्रोत: उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 (धारा 80), उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम 1961 (संशोधित 1994), मॉडल भवन उपविधि (Model Building Bye-Laws) उत्तर प्रदेश, तथा संबंधित विकास प्राधिकरण मास्टर प्लान। यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है; अपने केस के लिए हमेशा वकील या DSD Properties से सलाह लें।

उत्तर प्रदेश में जमीन खरीदना और उस पर मकान या दुकान बनाना किसी भी परिवार की जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला होता है। पर एक छोटी सी गलती पूरे निवेश को मिट्टी में मिला सकती है। गलती क्या? बिना सही कागज के निर्माण शुरू कर देना।

आपने प्रॉपर्टी डीलर से जरूर सुना होगा — “साहब, यहाँ धारा 80 की जरूरत नहीं है, सब सेट है, आप बस प्लॉट ले लीजिए।” और कई बार उल्टा भी — कोई बेवजह आपको धारा 80 के चक्कर में दौड़ाता रहता है, जबकि आपकी जमीन पर उसकी जरूरत ही नहीं थी।

तो सच क्या है? धारा 80 कहाँ अनिवार्य है, कहाँ बेकार है, और जिला पंचायत क्षेत्र में नक्शा पास कराने के लिए यह सबसे पहली शर्त क्यों बन जाती है — इस ब्लॉग में हम पूरी बात आसान भाषा में समझेंगे। पढ़ने के बाद कोई डीलर आपको गुमराह नहीं कर पाएगा।

45 दिनSDM कोर्ट से धारा 80 आदेश की कानूनी समय सीमा
धारा 239जिला पंचायत में भवन नक्शा अनुमोदन का आधार
1 अपवादगौतम बुद्ध नगर — जहाँ जिला पंचायत लागू नहीं
100% जोखिमबिना मंजूरी कटी कॉलोनी = अवैध कॉलोनी
एक लाइन में समझिए: अगर आपकी जमीन विकास प्राधिकरण (LDA, GDA, KDA) के मास्टर प्लान में है, तो SDM से धारा 80 कराने का कोई व्यावहारिक फायदा नहीं — वहाँ प्राधिकरण के नियम चलते हैं। पर अगर जमीन जिला पंचायत (ग्रामीण) क्षेत्र में है, तो धारा 80 के बिना आप एक ईंट भी कानूनी रूप से नहीं रख सकते।

धारा 80 (Dhara 80) आखिर है क्या?

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 80 कृषि भूमि (खेती की जमीन) को गैर-कृषि यानी अकृषक भूमि में बदलने की कानूनी प्रक्रिया है। पहले यही काम उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 की धारा 143 के तहत होता था। इसीलिए आज भी पुराने लोग इसे “143 करा लो” कहते हैं — मतलब वही है।

सीधी बात — अगर आपकी जमीन भूलेख (खतौनी) में “कृषि” दर्ज है और आप उस पर घर, दुकान, गोदाम, फैक्ट्री या प्लॉटिंग करना चाहते हैं, तो आपको पहले उप-जिलाधिकारी (SDM) के कोर्ट में आवेदन करके उस जमीन को “अकृषक” घोषित कराना पड़ता है। इसी पूरी कार्रवाई को धारा 80 कहते हैं।

कानून यह भी कहता है कि SDM को आवेदन की तारीख से 45 कार्य दिवस के अंदर अपना फैसला सुनाना होता है। और एक खास बात — सिर्फ इस आधार पर धारा 80 मना नहीं की जा सकती कि जमीन चहारदीवारी से घिरी है या मौके पर परती (खाली) पड़ी है। अगर आप कृषि भूमि को आवासीय बनाने की पूरी प्रक्रिया, शुल्क और निवेश मित्र पोर्टल पर आवेदन का तरीका जानना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए हमारे विस्तृत गाइड को पढ़ें।

मास्टर प्लान क्षेत्र में धारा 80 का असली सच

यहाँ सबसे बड़ी गलतफहमी होती है। बहुत से लोग बिना जरूरत के SDM कोर्ट के चक्कर काटते रहते हैं, जबकि उनकी जमीन पर वह कार्रवाई काम ही नहीं आने वाली। पहले यह समझिए कि आपकी जमीन किस तरह के क्षेत्र में आती है।

1

विकास प्राधिकरण / मास्टर प्लान क्षेत्र

जैसे लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), गाजियाबाद (GDA), कानपुर (KDA)। यहाँ अगर सरकार का मास्टर प्लान (जैसे मास्टर प्लान 2031) लागू है, तो SDM कोर्ट से धारा 80 कराने का कोई व्यावहारिक लाभ नहीं होता।

2

यहाँ नियम कौन तय करता है?

मास्टर प्लान क्षेत्र में निर्माण की अनुमति और नक्शा पास करने का पूरा अधिकार संबंधित विकास प्राधिकरण के पास होता है। प्राधिकरण मास्टर प्लान के सरकारी नक्शे में देखता है कि आपकी जमीन का भूमि उपयोग (Land Use) क्या है — आवासीय, व्यावसायिक या औद्योगिक।

3

इसका मतलब आपके लिए

अगर मास्टर प्लान में आपकी जमीन का लैंड यूज खेती (ग्रीन/एग्रीकल्चर ज़ोन) है, तो SDM का धारा 80 आदेश भी आपको वहाँ रिहायशी निर्माण की अनुमति नहीं दिला सकता। वहाँ प्राधिकरण के नियम ही सर्वोपरि हैं — इसलिए खरीदने से पहले मास्टर प्लान में लैंड यूज जरूर चेक कराएं।

जिला पंचायत क्षेत्र में धारा 80 क्यों 100% अनिवार्य है?

अब बात उस क्षेत्र की, जहाँ धारा 80 के बिना आप वाकई एक ईंट भी कानूनी रूप से नहीं रख सकते। अगर आपकी जमीन जिला पंचायत क्षेत्र (ग्रामीण या नॉन-प्लानिंग एरिया) में आती है, तो नक्शा पास कराने की सबसे पहली और अनिवार्य शर्त धारा 80 ही है।

जिला पंचायत क्षेत्र में कौन सी जमीनें आती हैं?

इसका फॉर्मूला बेहद आसान है। किसी भी जिले की कुल सीमा में से अगर आप नीचे दिए गए शहरी और प्राधिकरण वाले हिस्सों को हटा दें, तो बचा हुआ पूरा ग्रामीण इलाका जिला पंचायत का क्षेत्र कहलाता है:

शहरी निकाय (ये हटा दें)

नगर निगम (Nagar Nigam), नगरपालिका परिषद (Nagar Palika Parishad), नगर पंचायत (Nagar Panchayat), और छावनी परिषद (Cantonment Board) — इन सीमाओं के अंदर जिला पंचायत का अधिकार नहीं चलता।

प्राधिकरण व रेगुलेटेड एरिया (ये भी हटा दें)

कोई भी विकास प्राधिकरण (LDA, KDA आदि), रेगुलेटेड एरिया (Regulated Area), और औद्योगिक विकास प्राधिकरण (जैसे UPSIDA) — इन सबको हटाने के बाद जो बचा, वही जिला पंचायत है।

एक खास अपवाद — गौतम बुद्ध नगर: उत्तर प्रदेश में सिर्फ गौतम बुद्ध नगर (नोएडा / ग्रेटर नोएडा) ही ऐसा जिला है जहाँ जिला पंचायत काम नहीं करती, क्योंकि वहाँ का पूरा क्षेत्र औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के तहत आता है। बाकी पूरे प्रदेश में ग्रामीण निर्माण के लिए जिला पंचायत का नियम लागू होता है।

बिना धारा 80 के जिला पंचायत में नक्शा पास क्यों नहीं होता?

इसका जवाब कानून में ही छिपा है। उत्तर प्रदेश जिला पंचायत अधिनियम 1961 (संशोधित 1994) की धारा 239 के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में भवनों के नक्शे पास किए जाते हैं। यहाँ नक्शा पास करने का अधिकार जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी (Additional Chief Officer - ACO) और जिला पंचायत इंजीनियर के पास होता है।

अब असली अड़चन समझिए — ये अधिकारी तब तक आपके भवन या लेआउट नक्शे को मंजूरी नहीं दे सकते, जब तक राजस्व विभाग के रिकॉर्ड (खतौनी) में आपकी जमीन “कृषि” से “गैर-कृषि / अकृषक” दर्ज न हो जाए। यानी धारा 80 का आदेश ही वह चाबी है जो जिला पंचायत के दरवाजे खोलता है। धारा 80 नहीं, तो नक्शा नहीं — बात इतनी सीधी है।

धारा 80 के आवेदन के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए?

SDM कोर्ट में धारा 80 का आवेदन देते समय आमतौर पर ये दस्तावेज लगते हैं। सही और पूरे कागज लगाने से जांच जल्दी होती है और 45 दिन की समय सीमा में आदेश मिलने की संभावना बढ़ जाती है:

भूमि के दस्तावेज

नवीनतम खतौनी (भूलेख रिकॉर्ड), रजिस्ट्री / बैनामा की प्रति, और भूमि का नक्शा (शजरा/खसरा)। इनसे साबित होता है कि आप संक्रमणीय अधिकार वाले भूमिधर हैं।

पहचान और मालिकाना प्रमाण

आवेदक का आधार/पहचान पत्र, और यदि जमीन हाल में खरीदी है तो दाखिल खारिज (म्यूटेशन) की स्थिति। नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज होना जरूरी है।

शुल्क और शपथपत्र

निर्धारित रूपांतरण शुल्क (सर्कल रेट के अनुसार) का चालान और प्रयोजन बताते हुए शपथपत्र — कि जमीन का उपयोग आवासीय, व्यावसायिक या औद्योगिक किस काम के लिए बदला जा रहा है।

दस्तावेजों में जरा सी गड़बड़ी — जैसे खतौनी में कोई दूसरा नाम, बंटवारे का विवाद, या किसी सह-खातेदार की सहमति न होना — आवेदन को महीनों तक अटका सकती है। इसीलिए आवेदन से पहले भूलेख और मालिकाना हक की एक बार जांच करा लेना समझदारी है।

जिला पंचायत क्षेत्र में सही और सुरक्षित तरीका — कदम दर कदम

अगर आप ग्रामीण क्षेत्र में जमीन ले रहे हैं या अपनी कृषि भूमि पर निर्माण करना चाहते हैं, तो यह क्रम कभी न तोड़ें:

1

क्षेत्र की पहचान करें

सबसे पहले पता करें कि जमीन विकास प्राधिकरण/मास्टर प्लान में है या जिला पंचायत (ग्रामीण) में। इसी से तय होगा कि नक्शा कौन पास करेगा और धारा 80 की जरूरत है या नहीं।

2

खतौनी और भूलेख जांचें

भूलेख रिकॉर्ड में देखें कि जमीन “कृषि” दर्ज है या “अकृषक”। अगर पहले से अकृषक है, तो धारा 80 दोबारा कराने की जरूरत नहीं — सीधे नक्शे की ओर बढ़ें।

3

SDM कोर्ट में धारा 80 का आवेदन दें

संक्रमणीय अधिकार वाले भूमिधर के रूप में उप-जिलाधिकारी के सामने आवेदन करें कि जमीन को आवासीय/व्यावसायिक/औद्योगिक प्रयोजन के लिए अकृषक घोषित किया जाए।

4

जांच और आदेश (45 दिन के भीतर)

राजस्व अमले की स्थलीय जांच के बाद SDM 45 कार्य दिवस के अंदर घोषणा या नामंजूरी का आदेश देता है। मंजूरी मिलने पर जमीन अकृषक घोषित हो जाती है।

5

खतौनी में अकृषक दर्ज कराएं

आदेश के आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में जमीन का दर्जा बदलवाएं। अब आधिकारिक रूप से यह गैर-कृषि भूमि है।

6

जिला पंचायत में नक्शा जमा करें

ACO और जिला पंचायत इंजीनियर के समक्ष भवन/लेआउट नक्शा जमा करें। कॉलोनी काटनी है तो लेआउट प्लान की मंजूरी अनिवार्य है।

7

भवन उपविधि के अनुसार निर्माण करें

नक्शा पास होने के बाद भी सेटबैक, ऊंचाई और फायर सेफ्टी जैसे मॉडल भवन उपविधि के नियमों का पालन करते हुए ही निर्माण करें।

डीलर के ये झांसे — जिनसे लोग सबसे ज्यादा फंसते हैं

सावधान — इन बातों पर भरोसा न करें

  • “यहाँ धारा 80 की जरूरत नहीं” — अगर जमीन जिला पंचायत क्षेत्र में है और खतौनी में कृषि दर्ज है, तो यह झूठ है। धारा 80 के बिना नक्शा कभी पास नहीं होगा।
  • “रजिस्ट्री हो गई मतलब सब हो गया” — रजिस्ट्री सिर्फ मालिकाना हक देती है। निर्माण की अनुमति धारा 80 और नक्शा अनुमोदन से मिलती है, रजिस्ट्री से नहीं।
  • सीधे प्लॉटिंग और चहारदीवारी — कुछ डीलर बिना धारा 80 और बिना लेआउट मंजूरी के खेत में सड़कें काटकर प्लॉट बेच देते हैं। ऐसी कॉलोनी अवैध मानी जाती है।
  • “बाद में करा लेंगे, अभी पैसा दे दो” — खरीद के बाद धारा 80 अटकने पर सालों केस चलते हैं। पहले कागज, फिर पैसा।
  • मास्टर प्लान का गलत हवाला — प्राधिकरण क्षेत्र में अगर लैंड यूज खेती है, तो कोई SDM आदेश आपको रिहायशी निर्माण नहीं दिला सकता। डीलर की जुबानी मानने के बजाय मास्टर प्लान खुद चेक कराएं।

नियम न मानने पर क्या होता है? — अवैध कॉलोनी का खतरा

आजकल बहुत से बिल्डर और डीलर जिला पंचायत क्षेत्रों में खेती की जमीन खरीदकर बिना किसी सरकारी मंजूरी के सीधे प्लॉटिंग शुरू कर देते हैं। अगर कोई डेवलपर बिना धारा 80 कराए और बिना जिला पंचायत से लेआउट नक्शा पास कराए कॉलोनी काटता है, तो सरकार उसे “अवैध कॉलोनी” (Unauthorized Colony) घोषित कर देती है।

इसका नुकसान सीधे खरीदार को होता है। ऐसी कॉलोनियों में भविष्य में पक्की सड़कें, बिजली, पानी और सीवर जैसी सरकारी सुविधाएं मिलने में भारी दिक्कत आती है। बैंक लोन अटकता है, और सबसे बड़ा खतरा — निर्माण ढहाए जाने (Demolition) का जोखिम हमेशा बना रहता है। लखनऊ और आसपास LDA द्वारा कई अवैध कॉलोनियों पर बुलडोजर कार्रवाई इसका जीता-जागता उदाहरण है।

नक्शा पास होने के बाद भी ये नियम जरूरी (भवन उपविधि)

जमीन अकृषक होने और नक्शा पास होने के बाद भी आपको उत्तर प्रदेश सरकार की मॉडल भवन उपविधि (Model Building Bye-Laws) का पालन करना होता है। इसमें मुख्य रूप से तीन बातें तय होती हैं:

सेटबैक (Setbacks)

मकान के आगे, पीछे और बगल में कितनी जगह खाली छोड़नी है, यह प्लॉट के आकार और सड़क की चौड़ाई के हिसाब से तय होता है।

अधिकतम ऊंचाई

भवन की अधिकतम ऊंचाई और मंजिलों की सीमा क्षेत्र व सड़क की चौड़ाई के अनुसार निर्धारित होती है।

फायर सेफ्टी

बड़ी इमारतों में आग से सुरक्षा के इंतजाम — एग्जिट, फायर NOC आदि — अनिवार्य हैं।

DSD Properties आपकी कैसे मदद करता है

जमीन खरीदने से पहले यह जानना सबसे जरूरी है कि वह जिला पंचायत में है या प्राधिकरण में, खतौनी में कृषि दर्ज है या अकृषक, और मास्टर प्लान में उसका लैंड यूज क्या है। DSD Properties की प्रॉपर्टी वेरिफिकेशन टीम भूलेख रिकॉर्ड, धारा 80 की स्थिति, मास्टर प्लान लैंड यूज और कॉलोनी की वैधता — सब कुछ खरीद से पहले जांचती है।

एक छोटी सी जांच आपको लाखों रुपये और सालों की कानूनी परेशानी से बचा सकती है। डीलर की जुबानी पर भरोसा करने के बजाय कागज पर भरोसा कीजिए।

संबंधित गाइड जो आपके काम आएंगी

निष्कर्ष यही है — उत्तर प्रदेश के ग्रामीण या जिला पंचायत क्षेत्र में कोई भी पक्का निर्माण करने से पहले डीलरों के बहकावे में न आएं। सबसे पहले जमीन की धारा 80 की कागजी कार्रवाई पूरी करें, फिर जिला पंचायत से नक्शा स्वीकृत कराएं, और उसके बाद ही भवन उपविधि के अनुसार निर्माण शुरू करें। यही क्रम आपके निवेश को कानूनी रूप से सुरक्षित रखता है और भविष्य की हर सरकारी कार्रवाई से बचाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

धारा 80 और धारा 143 में क्या अंतर है?

दोनों एक ही काम के लिए हैं। पहले उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 की धारा 143 के तहत कृषि भूमि को अकृषक घोषित किया जाता था। अब उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 लागू है, जिसमें यही प्रावधान धारा 80 कहलाता है। पुराने लोग आज भी इसे 143 कहते हैं, पर कानूनी नाम अब धारा 80 है।

क्या LDA या किसी विकास प्राधिकरण क्षेत्र में धारा 80 जरूरी है?

व्यावहारिक रूप से नहीं। प्राधिकरण और मास्टर प्लान क्षेत्र में निर्माण की अनुमति और नक्शा पास करने का अधिकार प्राधिकरण के पास होता है, SDM के पास नहीं। वहाँ मायने यह रखता है कि मास्टर प्लान में आपकी जमीन का लैंड यूज क्या है। इसलिए खरीदने से पहले मास्टर प्लान में लैंड यूज जरूर जांचें।

जिला पंचायत क्षेत्र में नक्शा कौन पास करता है?

उत्तर प्रदेश जिला पंचायत अधिनियम 1961 की धारा 239 के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में नक्शा पास करने का अधिकार जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी (ACO) और जिला पंचायत इंजीनियर के पास होता है। पर वे तब तक नक्शा मंजूर नहीं करते जब तक जमीन खतौनी में अकृषक दर्ज न हो जाए।

धारा 80 का आदेश आने में कितना समय लगता है?

कानून के अनुसार SDM को आवेदन की तारीख से 45 कार्य दिवस के भीतर घोषणा या नामंजूरी का फैसला सुनाना होता है। व्यवहार में जांच और दस्तावेजों के आधार पर समय थोड़ा घट-बढ़ सकता है, पर 45 दिन की कानूनी सीमा तय है।

क्या चहारदीवारी या खाली पड़ी जमीन पर धारा 80 मना हो सकती है?

नहीं। कानून साफ कहता है कि सिर्फ इस आधार पर धारा 80 की घोषणा मना नहीं की जा सकती कि जोत या उसका भाग चहारदीवारी से घिरा है या मौके पर परती (खाली) है। फैसला असल भूमि उपयोग और दस्तावेजों के आधार पर होता है।

बिना धारा 80 कराए कॉलोनी में प्लॉट खरीद लिया तो क्या होगा?

अगर कॉलोनी जिला पंचायत क्षेत्र में बिना धारा 80 और बिना लेआउट मंजूरी के कटी है, तो वह अवैध कॉलोनी मानी जाती है। ऐसी जगह सरकारी सड़क, बिजली, पानी, सीवर मिलने में दिक्कत आती है, बैंक लोन अटकता है और निर्माण ढहाए जाने का खतरा रहता है। इसलिए खरीद से पहले कॉलोनी की वैधता जरूर जांचें।

गौतम बुद्ध नगर में जिला पंचायत का नियम क्यों लागू नहीं होता?

गौतम बुद्ध नगर (नोएडा / ग्रेटर नोएडा) उत्तर प्रदेश का इकलौता ऐसा जिला है जहाँ का पूरा क्षेत्र औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के अंतर्गत आता है। इसलिए वहाँ जिला पंचायत काम नहीं करती और निर्माण की अनुमति प्राधिकरण के नियमों से मिलती है।

रजिस्ट्री हो जाने के बाद भी क्या धारा 80 जरूरी है?

हाँ। रजिस्ट्री सिर्फ जमीन पर आपका मालिकाना हक प्रमाणित करती है। निर्माण की अनुमति इससे अलग चीज है। अगर जमीन कृषि दर्ज है और जिला पंचायत क्षेत्र में है, तो रजिस्ट्री के बाद भी निर्माण के लिए पहले धारा 80 और फिर नक्शा अनुमोदन कराना पड़ेगा।

कैसे पता करें कि मेरी जमीन जिला पंचायत में है या प्राधिकरण में?

अपने क्षेत्र की प्रशासनिक सीमा देखें — अगर जमीन नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत, छावनी, किसी विकास प्राधिकरण, रेगुलेटेड एरिया या औद्योगिक प्राधिकरण की सीमा में नहीं है, तो वह जिला पंचायत क्षेत्र में आती है। संदेह होने पर भूलेख और मास्टर प्लान जांच कराना सबसे सुरक्षित तरीका है।

क्या धारा 80 के बाद सीधे मकान बना सकते हैं?

नहीं, अकेले धारा 80 काफी नहीं है। धारा 80 के बाद जिला पंचायत से भवन या लेआउट नक्शा पास कराना और मॉडल भवन उपविधि (सेटबैक, ऊंचाई, फायर सेफ्टी) का पालन करना भी जरूरी है। तीनों कदम पूरे होने पर ही निर्माण पूरी तरह कानूनी माना जाता है।

क्या DSD Properties खरीद से पहले धारा 80 और कॉलोनी की वैधता जांच सकता है?

हाँ। DSD Properties की वेरिफिकेशन टीम भूलेख रिकॉर्ड, धारा 80 की स्थिति, मास्टर प्लान लैंड यूज और कॉलोनी की वैधता खरीद से पहले जांचती है, ताकि आप किसी अवैध या विवादित जमीन में पैसा न लगाएं।

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Sanjay Kumar

Author · DSD Properties

Sanjay Kumar is a property legal advisor with deep expertise in documentation, registrations, and dispute resolution. With more than 15 years in the field, he ensures that every property transaction is safe, compliant, and stress-free for his clients.

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